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बिहार में जमीन-फ्लैट खरीदना हुआ महंगा: सर्किल रेट बढ़े, रजिस्ट्री के लिए भी जेब पर बढ़ेगा बोझ

Published: Thu, 18 Jun 2026 07:56 PM (IST)Updated: Thu, 18 Jun 2026 08:39 PM (IST)

बिहार सरकार ने जमीन और फ्लैट के सर्किल रेट (MVR) में वृद्धि की घोषणा की है, जिससे अब संपत्ति खरीदना ...और पढ़ें

रजिस्ट्री पर सीधा असर (AI Generated Image)

रजिस्ट्री पर सीधा असर (AI Generated Image)

HighLights

  1. बिहार में जमीन-फ्लैट खरीदना अब महंगा हुआ।

  2. ग्रामीण MVR 1.6 गुना, शहरी MVR दोगुना बढ़ा।

  3. नया सर्किल रेट तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।

राज्य ब्यूरो, पटना।  बिहार में जमीन की कीमतों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एक दशक बाद सरकार ने गांव से लेकर शहरी इलाकों तक एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में वृद्धि कर दी है।

एमवीआर वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर जमीन की रजिस्ट्री की जाती है और इसे सर्किल रेट भी कहा जाता है।

ग्रामीण इलाकों में एमवीआर को 1.6 गुना जबकि शहरी और आसपास के क्षेत्रों में दोगुना कर दिया गया है। निबंधन विभाग ने नई दरों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

एक दशक बाद बढ़ा एमवीआर

ग्रामीण क्षेत्रों में एमवीआर में आखिरी संशोधन वर्ष 2013 में किया गया था, जबकि शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2016 में अंतिम बार बदलाव हुआ था।

इस दौरान जमीन की बाजार कीमतों में लगातार वृद्धि हुई, लेकिन सरकारी दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसी अंतर को देखते हुए सरकार ने अब नई दरें लागू की हैं।

अब हर साल स्वत: बढ़ेगा एमवीआर

राज्य सरकार ने जमीन की कीमतों के लिए वार्षिक वृद्धि का फार्मूला भी तय कर दिया है। इसके अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एमवीआर में स्वत: पांच प्रतिशत की वृद्धि होगी।

इसके अलावा हर तीन वर्ष पर विभागीय स्तर पर एमवीआर का पुनरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान नई सड़कें, औद्योगिक क्षेत्र, शहरी विस्तार, हवाईअड्डे, रेलवे स्टेशन और सिंचाई परियोजनाओं जैसे विकास कार्यों को ध्यान में रखा जाएगा।

किसानों को मिलेगा अधिक मुआवजा

एमवीआर बढ़ने का सबसे बड़ा लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनकी जमीन विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है।

विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्तमान एमवीआर के आधार पर राज्य की परियोजनाओं के लिए 14,897 करोड़ रुपये मुआवजा देय था। नई दरों के लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर 18,637 करोड़ रुपये हो जाएगी।

3,740 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान

नई व्यवस्था के तहत किसानों को लगभग 3,740 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा।

इसी प्रकार केंद्र सरकार की परियोजनाओं में किसानों को करीब 14,831 करोड़ रुपये अधिक मुआवजा प्राप्त होगा। वर्तमान दरों पर 24,629 करोड़ रुपये देय थे, जो अब बढ़कर 39,460 करोड़ रुपये हो जाएंगे।

जमीन की रजिस्ट्री भी हुई महंगी

एमवीआर बढ़ाने के साथ ही जमीन की रजिस्ट्री कराना भी महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने सामान्य स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।

अब शहरी क्षेत्रों में स्टाम्प और निबंधन शुल्क मिलाकर जमीन या फ्लैट की कीमत का 11 प्रतिशत खर्च होगा, जो पहले 10 प्रतिशत था। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह शुल्क आठ प्रतिशत से बढ़कर नौ प्रतिशत हो गया है।

महिलाओं को मिलेगी अधिक छूट

महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने महिलाओं के नाम पर जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर मिलने वाली स्टाम्प शुल्क छूट बढ़ा दी है।

पहले महिलाओं को 0.3 प्रतिशत की छूट मिलती थी, जिसे बढ़ाकर 0.4 प्रतिशत कर दिया गया है। निबंधन शुल्क में 0.1 प्रतिशत की पुरानी छूट जारी रहेगी। इस तरह महिलाओं को अब कुल 0.5 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

जमीन की श्रेणियों में भी बदलाव

राज्य सरकार ने एमवीआर निर्धारण के लिए भूमि की श्रेणियों को भी नए सिरे से तय किया है। अब तक अलग-अलग जिलों में जमीन की अलग-अलग श्रेणियां लागू थीं।

नई व्यवस्था के तहत सभी जिलों में एकरूपता लाई गई है। ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों में भूमि की सात श्रेणियां तथा शहरी एवं मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों में छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

मंत्री ने बताया किसानों के लिए लाभकारी फैसला

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग एक दशक बाद एमवीआर बढ़ाया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण कर रही है। ऐसे में एमवीआर बढ़ने से किसानों को पहले की तुलना में अधिक मुआवजा राशि प्राप्त होगी।

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