पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Politics: बिहार में दो विधानसभा सीटों- कुशेश्वरस्थान और तारापुर के उप चुनाव के लिए जिस समय राजद और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, माना जा रहा था कि दोस्ताना लड़ाई होगी। यह भी कि अंतत: दोनों सुलह कर लेंगे। लेकिन, दोनों सीटों के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पहले वह राजद से ही दो-दो हाथ करना चाह रही है। इसके बाद कांग्रेस माय समीकरण के वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए जी जान से जुट गई है। राजद के आधार वोट माय (मुस्लिम-यादव) में हिस्सेदारी बढ़ाने की कांग्रेस की मंशा उसके स्टार प्रचारकों की सूची से जाहिर हुई।

कांग्रेस के स्‍टार प्रचारकों की सूची से राजद सतर्क

कांग्रेस की ओर से कुल 20 स्टार प्रचारकों की सूची में छह मुस्लिम चेहरे हैं। तारिक अनवर, डा. शकील अहमद, डा. मो. जावेद, शकील अहमद खान, इमरान प्रतापगढ़ी और डा. शकील उज्जमा अंसारी। कांग्रेस ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 30 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी, सिर्फ पांच  मुस्लिम चेहरे थे। उनमें गुलाम नबी आजाद भी थे। इस बार दो सीटों के उप चुनाव में ऐसे छह स्‍टार प्रचारक हैं। हालांकि, दोनों क्षेत्रों में कितने मुस्लिम वोटर हैं, इसका ठीक-ठीक आंकड़ा किसी के पास नहीं है। फिर भी चुनावी राजनीति की भाषा में इन्हें निर्णायक माना जाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव तक कुशेश्वरस्थान में मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस का साथ दिया था। तारापुर में उनकी पसंद राजद उम्मीदवार बने थे।

वाई फैक्‍टर से दो नये पर्यवेक्षक

कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान से पूर्व सांसद रंजीत रंजन और तारापुर से चंदन यादव को पर्यवेक्षक बनाया है। रंजीत रंजन जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव की पत्नी हैं। दोनों पर्यवेक्षकों की तैनाती यादव वोटरों को इस हद तक रिझाने के इरादे से की गई है कि इस बिरादरी के लोग कांग्रेस के पक्ष में वोट कर सकें। यह कहना मुश्किल है कि कांग्रेस की इन कोशिशों से माय समीकरण के वोटर किस हद तक उससे जुड़ेंगे, लेकिन इतना तय है कि फिलहाल राजद की कठिनाई बढ़ गई है। कांग्रेस यह भ्रम तोड़ने की कोशिश भी कर रही है कि राजद से रणनीतिक संधि के तहत वह दोनों सीटों पर लड़ रही है।

कांग्रेस की सक्रियता से एनडीए में उत्साह

कांग्रेस की सक्रियता से एनडीए और खासकर दोनों सीटों पर चुनाव लड़ रहे जदयू में उत्साह है। यह उस आकलन के चलते है कि एनडीए के विरोधी वोटर दो हिस्से में बंट जाएंगे। आम चुनाव में दोनों सीटों पर महागठबंधन के एक-एक उम्मीदवार थे। जदयू के साथ उनका कड़ा मुकाबला था। इस बार अगर वोटों का बिखराव होता है तो जदयू को उसका लाभ मिलेगा। किसे कितना लाभ मिलेगा, यह चुनाव नतीजे से ही पता चलेगा, फिलहाल कांग्रेस की सक्रियता महागठबंधन में बिखराव की ओर इशारा करती है।