पटना, आनलाइन डेस्क। बिहार में ताड़ी को लेकर सियासत तेज  है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक तरफ जहां ताड़ी का व्यवसाय छोड़कर अन्य काम करने के लिए एक लाख की मदद दे रहे हैं, वहीं जीतन राम मांझी की ताड़ी को लेकर अलग ही राय है। मांझी का कहना है कि ताड़ी नेचुरल जूस है। इसे बैन करना ठीक नहीं है।

मांझी ने ताड़ी को बताया नेचुरल जूस

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को कहा है कि ताड़ी नेचुरल जूस है। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कई बार कहा है कि ताड़ी पर बैन लगाना ठीक नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो मन में ठान लेते हैं उसे करके दिखाना चाहते हैं। ताड़ी के व्यवसाय से बिहार के लाखों लोग जुड़े हैं। इसे शराब की श्रेणी में नहीं रखना चाहिए। इस पेशे से समाज के कई लोग जुड़े हैं। मांझी ने यह भी कहा कि ताड़ी से ला एंड आर्डर पर भी कई असर नहीं पड़ता है। उन्होंने ताड़ी पर प्रतिबंध को गलत बताया है। हालांकि कि मांझी ने यह भी कहा कि ये उनकी पार्टी की नही व्यक्तिगत राय है।

ताड़ी को लेकर सरकार की अलग सोच

मांझी ताड़ी बैन को गलत बता रहे हैं, लेकिन बिहार सरकार ताड़ी एवं शराब के उत्पादन, बिक्री और इससे किसी भी तरह से जुड़े रहे परिवार व लोगों द्वारा इस धंधे को छोड़कर दूसरा काम करने पर एक लाख रुपये देगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना का दायरा बढ़ाने की मंजूरी मिल गई। सतत जीविकोपार्जन योजना का मुख्य उद्देश्य देसी शराब और ताड़ी की बिक्री व उत्पादन छोड़कर दूसरे काम करने वाले गरीब परिवार के लोगों को दूसरा रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए 610 करोड़ रुपये की स्वीकृति कैबिनेट ने दी है। 

शराबबंदी पर मांझी उठा चुके हैं सवाल

बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर भी जीतन राम मांझी कई बार सवाल उठा चुके हैं। मांझी कई मौके पर सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि बिहार के कई बड़े अधिकारी रात में शराब का सेवन करते हैं। उन्होंने यह कहा था कि शराब को अगर दवा की तरह इस्तेमाल किया जाए तो ये गलत नहीं है। 

Edited By: Rahul Kumar

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