भुवनेश्वर  वात्स्यायन, पटना। आरसीपी सिंह के खुद के प्रोजेक्शन का आक्रामक अंदाज ही उन्हें ले डूबा। कथित तौर पर जिनके भरोसे से वह सक्रिय थे उनका भी उन्हें मौके पर सहारा नहीं मिला और जदयू आज बिना किसी लाग लपेट के उन्हें चिराग गति के विशेषण से नवाज रहा। यह भी तय था कि अगर आरसीपी सिंह ने जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया होता तो इसी माह या फिर अगले महीने के पहले हफ्ते उनकी जदयू से विदाई तय थी। आरसीपी सिंह ने जिस तरह से केंद्र में मंत्री बनने के बाद अपने को बिहार में प्रोजेक्ट किया वह जदयू नेतृत्व को अलर्ट मोड में ला दिया था। मंत्री बनने के बाद जब वह पहली बार पटना आ रहे थे तब जिस तरह से उनके स्वागत का इंतजाम पटना एयरपोर्ट से लेकर जदयू के प्रदेश कार्यालय तक किया गया था उसने साफ-साफ यह संदेश देना शुरू कर दिया था कि जदयू में दो गुट सक्रिय हो गए हैं।

कई बार उच्च स्तर से इस पर स्पष्टीकरण भी आया कि जदयू में कोई गुट नहीं है। मंत्री बनने के कुछ ही दिनों बाद आरसीपी सिंह ने पटना  स्थित अपने पुराने सरकारी बंगले में वृहत स्तर पर जदयू कार्यकर्ताओं के लिए भोज का आयोजन कर डाला। उसी दिन उन्होंने एक नए एंगल पर अपने प्रोजेक्शन की बात आगे बढ़ा दी कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्म दिवस के दिन से पूरे प्रदेश का दौरा कर लोगों से मिलेंगे। संगठन पर बातें होंगी और सदस्यता अभियान भी चलेगा। तब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसका प्रत्युत्तर करते हुए यह कहा था कि बगैर पार्टी की सहमित के कोई सदस्यता अभियान कैसे चला सकता है। जदयू ने पार्टी की बगैर अनुमित के आरसीपी सिंह के राजनैतिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले जदयू के पदाधिकारियों को विदा कर दिया। उसी समय यह बात होने लगी कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले कार्रवाई हुई तो यह तय है कि कार्यक्रम आयोजित करने वाले भी नपेंगे। 

राज्यसभा टिकट न मिलने से बढ़ी बेचैनी

इस बीच जब आरसीपी सिंह को जदयू ने राज्यसभा का टिकट नहीं दिया तो उनकी बेचैनी अधिक बढ़ गई। उम्मीद थी कि भाजपा इन्हें कहीं से एडजस्ट करेगी पर बात नहीं बनी। भाजपा से एडजस्ट किए जाने की बात के मूल में यह था कि जदयू की राष्ट्रूीय कार्यकारिणी में यह कहा गया था कि आरसीपी के भाजपा से मधुर रिश्ते हैं। इसी बीच जदयू ने यूपी के धनंजय सिंह को अपना राष्ट्रीय महासचिव बनाया तो आरसीपी के वाट्सऐप ग्रुप में जदयू नेतृत्व पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई। तीव्र गति से वह जदयू नेतृत्व पर मारक हो रहे थे। इसी अंदाज ने उन्होंने अपने साहब को भी लापरवाह कह दिया और इसकी परिणति सामने है। जब तक नीतीश कुमार एनडीए में हैं तब तक आरसीपी को चिराग गति से मुक्ति नहीं मिल सकेगी। 

Edited By: Akshay Pandey