पटना , अरविंद शर्मा। बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly polls)  के बाद भाजपा (BJP)  ने अपनी चाल में दो बड़ा बदलाव किया है। पहला प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी (sushil Kuamar Modi) को बिहार से हटाकर दिल्ली की राजनीति में भेजा है और दूसरा राष्ट्रीय स्तर के नेता सैयद शाहनवाज हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain)  को बिहार में उतारा है। राजनीतिक प्रेक्षक (Political analyst)  इस फेरबदल को बड़े चश्मे से देख रहे हैं। खासकर विपक्षी (opposition) खेमे की राजनीति का विश्लेषण भी इसी नजरिए से किया जा रहा है।

शाहनवाज को मिल सकती बड़ी जिम्‍मेदारी

सबसे पहले बिहार में शाहनवाज की जरूरत की बात। विधानसभा में सत्ता पक्ष के 126 सदस्य हैं, मगर मुस्लिम समुदाय (Muslim community)  का एक भी नहीं है। भाजपा का तो विधान परिषद (Legislative Council) में भी एक भी मुस्लिम सदस्य नहीं है। ऐसे में शाहनवाज को राज्य सरकार में बड़ी जिम्मेवारी दी जा सकती है। विपक्ष की राजनीति पर असर की शुरुआत इसी प्लेटफॉर्म से होने की बात कही जा रही है। देखना होगा कि भाजपा अपने राष्ट्रीय कद-पद के इस नेता को कितना और किस रूप में आगे बढ़ाती है।

राजद के कई तर्को के जवाब हैं शाहनवाज

फिलहाल माना जा रहा है कि शाहनवाज के सहारे भाजपा के रणनीतिकार विपक्ष के कई मुद्दों की धार को कुंद करने की तैयारी में है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद (RJD Supremo Lalu Prasad) के माय (Muslim-Yadav) समीकरण के आधे हिस्से को सत्तारूढ़ दलों की ओर से शाहनवाज तो संतुलित करेंगे ही, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Leader of opposition Tejashwi Yadav) के तल्ख स्वर में सरकार पर लगाए गए आरोपों का जवाब भी वह बहुत शालीनता और तार्किक तरीके से दे सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी (Ex PM Atal Bihari Vajpayee) की सरकार में मंत्री रह चुके शाहनवाज की पहचान भाजपा के कुशल प्रवक्ता (good orator) के रूप में भी होती है। पार्टी की बात रखने की कला वह बखूबी जानते हैं। बिहार में जातपात की राजनीति (caste based politics in Bihar) दशकों से हावी है। लालू प्रसाद को इसका मास्टर माना जाता है। शाहनवाज उनकी चाल पर भी प्रहार कर सकते हैं। खुद की मुस्लिम-यादव की पहचान रखने वाले राजद का भाजपा पर अक्सर आरोप रहा है कि वह कुछ खास जातियों को संतुष्ट रखने की सियासत करती है। शाहनवाज को बिहार की राजनीति की मुख्यधारा में वापस लाकर भाजपा की ओर से तेजस्वी के ऐसे आरोपों को बेमतलब बताने की कोशिश की जा सकती है।

बदल सकती है राजद-कांग्रेस की रणनीति 

माय समीकरण के सहारे बिहार में मजबूती के बावजूद राजद ने पिछले कुछ समय से मुस्लिमों को हाशिये पर ही रखा है। बड़े कद के बाद भी अब्दुल बारी सिद्दीकी (Abdul Bari Sidiqui) जैसे नेताओं को वह ओहदा नहीं मिला, जिसके वह हकदार हैं। हालांकि इस बार वह विधानसभा (Bihar Assembly Election) का चुनाव हार गए हैं, परंतु बदले हालात में राजद अपनी चाल में बदलाव कर सकता है। किसी मुस्लिम नेता को अहम ओहदा दे सकता है। असदुद्दीन ओवैसी (Assadudin Owaisi) के बिहार में प्रवेश के बाद पहले से ही परेशान कांग्रेस में भी कौकब कादरी (Kaukab Kadri) एवं तारिक अनवर (Tariq Anwar) सरीखे नेताओं का भाव बढ़ सकता है।

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Edited By: Sumita Jaiswal