पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Police News: बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्य के सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखकर भूमिहीन थानों के लिए जमीन चिह्नित करने को कहा है। राज्य में अभी 97 थाने और 47 ओपी भूमिहीन हैं। इसके लिए पहले सरकारी जमीन चिह्नित करने को कहा गया है। सरकारी जमीन नहीं मिलने पर जमीन की खरीद की जाएगी। इसके लिए एसपी को भी जवाबदेही दी गई है। गृह विभाग के प्रभारी मंत्री बिजेंद्र यादव ने कहा है कि दो हजार से अधिक सिपाही बहाली की प्रक्रिया चल रही है। विज्ञापन निकाला जा चुका है। इस बहाली के अंतर्गत खेल कोटा से 20 और दूसरे पुलिस कर्मियों के 1998 पद भरे जाएंगे। वे गुरुवार को विधान परिषद में ललन कुमार सर्राफ के प्रश्न पर सरकार का पक्ष रख रहे थे।

सरकारी जमीन नहीं होने पर खरीदने का भी विकल्‍प

सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जमीन अधिग्रहण में स्थानीय थानों व पुलिस पदाधिकारी का भी सहयोग लिया जाए। अगर अधिग्रहण के लिए सरकारी जमीन नहीं हो तो जमीन खरीद के लिए जिलाधिकारी स्तर से स्पष्ट प्रस्ताव विभाग को भेजा जाए। जिला स्तर पर जमीन की संभावना की जांच के लिए बनी कमेटी द्वारा भूमि संभावना की जांच की जाए। जमीन अधिग्रहण व लीज पर जमीन लेने के लिए एसपी या एसएसपी डीएम को अधियाचना भेजेंगे, जिसके बाद पुलिस मुख्यालय से आवंटन राशि की मांग की जाएगी। लीज व अधिग्रहण की कार्रवाई को पूर्ण करने के लिए जिला मुख्यालय डीएसपी पदेन पदाधिकारी होंगे। ऐसी जमीन का निबंधन शुल्क माफ किया जाएगा।

चल रही है दो हजार से अधिक सिपाही बहाली की प्रक्रिया

प्रभारी मंत्री ने सदन को बताया कि जिन दो हजार से अधिक पदों पर बहाली होगी वह पुलिस अवर सेवा आयोग से चयनित 2277 अवर निरीक्षकों और खेल कोटा के 21 पदों पर बहाली के लिए जारी विज्ञापन से अलग हैं। इन पदों के अलावा आशु सहायक अवर निरीक्षक के 133 और कर्मचारी चयन आयोग के विज्ञापन से 165 टंकक सहायक अवर निरीक्षकों की बहाली भी प्रक्रियाधीन है।

करीब 60 हजार पद हैं रिक्‍त

मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में स्वीकृत पदों पर बहाली होती है। पुलिस महकमे में पदाधिकारी और कर्मचारी के 1,42,216 पद स्वीकृत हैं। इन स्वीकृत पदों में 84,165 वर्तमान में भरे हुए हैं। प्रश्नकर्ता के पूरक पर उन्होंने कहा कि मधेपुरा जिले में 70 पदों पर सिपाही की नियुक्ति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। 10 पदों पर चालक सिपाही की नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने पिछले पांच वर्ष के अपराध के आंकड़ों के आधार पर सदन को बताया कि अपराध में जिले में कमी आई है।