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बिहार के विश्वविद्यालयों में PhD दाखिले के नियम सख्त, समझें नए प्रावधान और सीटों का गणित

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:03 PM (IST)

बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले के नियमों को सख्त किया गया है, जिसमें अनियमितताओं को रोकने के लिए नए ...और पढ़ें

बिहार में अब आसान नहीं होगा पीएचडी में दाख‍िला। सांकेत‍िक तस्‍वीर

बिहार में अब आसान नहीं होगा पीएचडी में दाख‍िला। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. पीएचडी रेगुलेशन, 2026 के नए प्रावधानों से प्रवेश।

  2. नेट पात्रता उसी वर्ष के नामांकन चक्र के लिए मान्य।

  3. रिक्त सीटों की संख्या पर अब सख्त सीमा लागू।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन के मानकों को और सख्त कर दिया गया है। यह कदम पीएचडी में प्रवेश संबंधी कई स्तर पर बरती जा रही अनियमितताओं के मद्देनजर उठाया गया है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के आदेश के आलोक में सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी आर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन,2026 के नए प्रविधानों के अनुरूप ही प्रवेश लेने को कहा गया है।

साथ ही पीएचडी के लिए लंबित नामांकन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने और आगे की प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संचालित करने का आदेश दिया गया है।

राज्यपाल सचिवालय का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू

इस संबंध में शुक्रवार को राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी कुलपतियों को आदेश पत्र जारी किया है।

उन्होंने पीएचडी में नेट की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट आदेश दिया है। इसके तहत नई व्यवस्था में जिस वर्ष अभ्यर्थी ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है, उसे उसी वर्ष के पीएचडी में नामांकन चक्र के लिए पात्र माना जाएगा।

जैसे वर्ष 2024 सत्र में नामांकन के लिए नेट-2024 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पात्र माना जाएगा। नेट योग्यता और उसके वेटेज का निर्धारण पीएचडी रेगुलेशन, 2026 के अनुसार होगा।

आदेश में यह भी कहा गया है है कि सभी विश्वविद्यालय वर्ष 2024, 2025 और 2026 के पीएचडी नामांकन प्रक्रिया से संबंधित विज्ञापन जल्द-से-जल्द जारी कर लंबित प्रक्रिया को नियमित करें।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पीएचडी आर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन, 2026 के नए प्रविधानों के अनुरूप ही प्रवेश
  • शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, सुविधाओं व निर्धारित मानकों को पालन अनिवार्य
  • 2026 सत्र तक पीएचडी प्रवेश की रिक्त सीटों की दो-तिहाई सीटों तक ही नामांकन

गड़बड़ी करने पर दोषी पदाधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

भविष्य में पीएचडी नामांकन में अनावश्यक विलंब नहीं हो, इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करें। यह आदेश बिहार कृषि विश्वविद्यालय और बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को छोड़कर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को दिया गया है।

पीएचडी शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसी एक पीएचडी नामांकन चक्र में उपलब्ध रिक्त सीटों की एक-तिहाई से अधिक सीटें नहीं भरी जाएंगी।

वहीं, 2026 सत्र तक रिक्त सीटों की अधिकतम दो-तिहाई सीटों तक नामांकन लिया जाएगा। संबंधित विश्वविद्यालयों को शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, शोध सुविधाओं और पीएचडी नियमों में निर्धारित अन्य मानकों को भी ध्यान में रखना होगा