PG करने वाले छात्रों के लिए जरूरी खबर, बिहार में 2027-28 से लागू होगा नया पाठ्यक्रम; समझें क्या बदलेगा?
बिहार के विश्वविद्यालयों में 2027-28 से नया पीजी पाठ्यक्रम लागू होगा, जिसमें तीसरे सेमेस्टर में कोर्स वर्क चुनने वाले छात्रों को चौथे में एक विषय के पांच पेपर पढ़ने होंगे।

पीजी में अब एक विषय के पांच पेपर पढ़ेंगे छात्र। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
2027-28 से बिहार पीजी पाठ्यक्रम में नए नियम लागू।
एक विषय में गहन अध्ययन, पांच पेपर पढ़ना अनिवार्य।
पीजी छात्रों के लिए रिसर्च पेपर प्रकाशित करना भी जरूरी।
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में दो वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। अब तीसरे सेमेस्टर में कोर्स वर्क का चयन करने वाले विद्यार्थियों को चौथे सेमेस्टर में उसी विषय के पांच पेपर पढ़ने होंगे।
इसके माध्यम से विद्यार्थियों को एक विषय में गहन अध्ययन करने और विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू होगी।
नई व्यवस्था के तहत तीसरे सेमेस्टर में समूह एक के अंतर्गत कोर्स वर्क का विकल्प चुनने वाले पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की विशेषज्ञता डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव (DSE) पेपर के आधार पर तय होगी।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किसी एक विषय में गहराई से अध्ययन करने के साथ उस क्षेत्र में मजबूत अकादमिक आधार उपलब्ध कराना है।
तीसरे सेमेस्टर में चुनने होंगे दो विषय
तीसरे सेमेस्टर में डीएसई-1 और डीएसई-2 के तहत उपलब्ध तीन-तीन विषयों में से विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार एक-एक विषय चुनना होगा।
प्रत्येक विषय चार क्रेडिट का होगा। इसके बाद चौथे सेमेस्टर में चयनित विषय से संबंधित पांच पेपर पढ़ने होंगे। सभी पांच पेपर पूरे करने पर विद्यार्थियों को चार-चार क्रेडिट के हिसाब से कुल 20 क्रेडिट मिलेंगे।
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर के लक्ष्य के अनुसार विषय चयन करने की स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही, किसी खास विषय में विशेषज्ञता हासिल करने से उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार के अवसरों में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
पीजी में रिसर्च पेपर प्रकाशित करना भी अनिवार्य
पीजी के तीसरे सेमेस्टर में शोध का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों के लिए अब जर्नल में रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना भी अनिवार्य होगा।
पहले यह नियम केवल पीएचडी के विद्यार्थियों पर लागू था। अब पीजी स्तर पर भी शोध पत्र के प्रकाशन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए 200 अंक और दो क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं।
इस पहल से स्नातकोत्तर स्तर पर ही विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति विकसित करने और उन्हें शोध कार्य की बारीकियों से परिचित कराने में मदद मिलेगी। साथ ही, विद्यार्थी आगे पीएचडी और अन्य उच्चस्तरीय शोध कार्यक्रमों के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
