पटना, स्‍टेट ब्‍यूरो। केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि (CRIF) के तहत राज्यों को उनके यहां संग्रह हुई सेस राशि का तीन गुना दिए जाने का प्रवधान है। वर्ष 2018-19 में बिहार के लिए यह राशि तीन गुना से बढ़ाकर नौ गुना कर दी गई। फिर भी सड़क निर्माण का मामला ट्रैक पर नहीं आ रहा है।

सड़क निर्माण की यह है पूरी स्थिति

सीआरआइएफ के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार की 27 सड़क परियोजनाओं को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इसके तहत 390.64 किमी सड़क का निर्माण होना है। राज्य सरकार ने इसके तहत 1232.63 करोड़ रुपये की योजनाओं को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दी हुई है। इनमें चार परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है और 22 परियोजनाओं का काम अब भी प्रक्रिया में है। एक परियोजना की तो निविदा भी अभी नहीं हुई है। इन 27 परियोजनाओं का दायरा सूबे के 13 जिलों के बीच है।

2019-20 मे नहीं मिला कोई आवंटन

सीआरआइएफ के तहत 2018-19 में इस तरह स्वीकृत योजनाओं की संख्या हो गई कि 2019-20 में बिहार की एक भी योजना को सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अपनी अनुमति प्रदान नहीं की। वहीं वर्ष 2020-21 के लिए 17 परियोजनाओं की स्वीकृति का मामला भी अभी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत प्रक्रियाधीन ही है। वैसे 2020-21 के लिए मंत्रालय ने अब तक सीआरआइएफ मद में तीन किस्तों में 344.69 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। दो दिन पहले 85 करोड़ रुपये भी आए हैं। वहीं 2021-22 में सीआरआइएफ के अंतर्गत राज्य सरकार के बजट में छह सौ करोड़ रुपये का प्रावधान है।

दूसरे राज्यों से काफी पीछे है बिहार

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सीआरआइएफ में दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार काफी पीछे है। वर्ष 2020-21 की जो रिपोर्ट है उसके अनुसार 17 अप्रैल तक बिहार को 96.69 करोड़ आवंटित किए जा चुके थे। जबकि, प्रवधान 193.39 करोड़ रुपये का है। मध्य प्रदेश में 537.71 करोड़, आंध्र प्रदेश में 321.58 करोड़, ओडिशा में 286.97 करोड़, गुजरात में 419.39 करोड़, यूपी में 574.64 करोड़, राजस्थान में 618.87 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 206.10 करोड़ रुपये है।

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