संवाद सहयोगी, चौसा (बक्सर) : बिहार सरकार द्वारा इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षित पद पर राज्य के बने हुए जाति प्रमाण पत्र को ही मान्य करने का नियम लागू किया गया है। इससे कई प्रत्याशियों के अरमानों पर पानी फिर गया है। जहां कई चुनाव से वंचित हो गए तो कुछ प्रत्याशियों ने इसके लिए अलग जुगाड़ बना नामांकन किया है। वहीं कुछ प्रत्याशी उसी पर दांव आजम लिए लेकिन उनका चाल विफल हो गई। राजपुर प्रखंड में नामांकन समाप्त होने के बाद विगत 16 सितंबर से चल रही जांच में विभिन्न पंचायतों में विभिन्न पदों के कुल 27 नामांकन पर्चे अवैध घोषित किए गए। कुछ पर्चों में आरक्षण का फेरा होने पर अवैध किया गया तो कुछ यूपी में मायके से बने प्रमाण पत्र अवैध होने का कारण बने। बाकी सभी पदों के पर्चे वैध हुए। शनिवार को नाम वापसी के बाद बाकी बचे अभ्यर्थी मैदान में ताल ठोकेंगे।

प्रखंड निर्वाची पदाधिकारी इंदुबाला सिंह ने बताया कि राजपुर में नामांकन किए गए सिरमौर पद मुखिया व सरपंच के सभी पंचायतों के सभी पर्चे वैध घोषित हुए, जबकि पंचायत समिति सदस्य के विभिन्न पंचायतों के चार पर्चे मंगरांव, खीरी, राजपुर व कैथहर कला पंचायत के एक-एक पर्चे अवैध घोषित हुए। मंगरांव व राजपुर के अभ्यर्थी का प्रमाण पत्र यूपी के होने के कारण, जबकि खीरी में प्रस्तावक की उम्र कम होने व कैथहर कला में अनुसूचित सीट पर पिछड़ा वर्ग का अभ्यर्थी का पर्चा अवैध होने का कारण बना। वहीं वार्ड सदस्य में कैथहर कला पंचायत से चार मटकीपुर व धनसोई में दो-दो पर्चे, दुल्फा में एक पर्चे समेत वार्ड सदस्य पद के कुल नौ पर्चे अवैध हुए। वार्ड पंच के विभिन्न पंचायत के कुल 14 पर्चे अवैध घोषित किए गए। जिनमें दुल्फा पंचायत में अकेले वार्ड पंच के सात पर्चे, समहुता व मटकीपुर के दो-दो पर्चे, धनसोई, रसेन व सिकठी पंचायत में वार्ड पंच के विभिन्न वार्डों के एक-एक पर्चे अवैध घोषित किए गए। इस तरह कुल 2212 नामांकन में अब 2185 अभ्यर्थी मैदान में बचे हैं। अभी 18 सितंबर शनिवार को नाम वापसी होनी है। उसके बाद जो बचेंगे मैदान में ताल ठोकेंगे।

Edited By: Akshay Pandey