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पालीगंज में गहराता जल संकट, अब गांवों में भी बिकने लगा 'डब्बा बंद' पानी; कुएं और चापाकल हुए बेगाने

Published: Tue, 28 Apr 2026 06:02 AM (IST)

पालीगंज के गांवों में पारंपरिक जल स्रोत सूखने और दूषित होने से जल संकट गहरा गया है। भूजल स्तर में ...और पढ़ें

अब गांवों में भी बिकने लगा 'डब्बा बंद' पानी

अब गांवों में भी बिकने लगा 'डब्बा बंद' पानी

HighLights

  1. पालीगंज के गांवों में जल संकट गंभीर हुआ।

  2. पारंपरिक जल स्रोत सूख रहे या दूषित हो रहे।

  3. ग्रामीण डब्बा बंद पानी खरीदने को विवश हैं।

अजय कुमार, पालीगंज। एक समय था जब गांवों की पहचान उनके मीठे पानी वाले कुओं और चापाकलों से होती थी। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे घड़े-लोटे लेकर पानी भरने निकल पड़ते थे। कुएं का पानी शुद्ध और स्वादिष्ट माना जाता था, वहीं चापाकल का पानी इतना मीठा होता था कि दाल-भात जल्दी पक जाया करता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। 

गांव-कस्बों में भी अब डब्बा बंद पानी (पैक्ड वाटर) की एंट्री हो चुकी है। कई जगहों पर रोजाना टेंपो से बड़े-बड़े पानी के जार पहुंच रहे हैं और लोग पैसे देकर पानी खरीदने को मजबूर हैं।

कई क्षेत्रों में चापाकल का पानी अब दूषित

ग्रामीण सुनील कुमार ने बताया कि लोगों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं, भूजल स्तर में गिरावट, लगातार बोरिंग और कम वर्षा के कारण पानी नीचे चला गया है। जल स्रोतों का खत्म होना, गांवों के पारंपरिक कुएं और तालाब या तो सूख गए या अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए। 

प्रदूषण का खतरा कई क्षेत्रों में चापाकल का पानी अब दूषित हो चुका है, जिसमें आयरन, फ्लोराइड या आर्सेनिक जैसे तत्व पाए जा रहे हैं। पालीगंज प्रखंड के ग्रामीण बताते हैं, “पहले चापाकल का पानी ही काफी था, लेकिन अब उसका स्वाद बदल गया है। मजबूरी में जार का पानी मंगाना पड़ता है।” यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पूरी तरह से व्यापारिक वस्तु बन सकता है।

पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की जरूरत

विकास कुमार ने बताया कि गरीब परिवारों के लिए यह एक बड़ी आर्थिक चुनौती भी बन सकती है। सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई गईं, पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगहों पर अभी भी अधूरी है। गांवों में डब्बा बंद पानी का पहुंचना सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जल संकट और प्रदूषण का संकेत है। 

यह बदलाव हमें चेतावनी देता है कि यदि अभी भी पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।