जागरण संवाददाता, पटना: कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, सावधानी हटते ही कोरोना तेजी से पलटवार कर सकता है। कोरोना को ऐसा ही मौका दे रही राजधानी पुलिस। कोरोना काल में संक्रमण की आशंका को देखते हुए जिस ब्रेथ एनालाइजर का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था, लेकिन इन दिनों फिर से हो रहा है। पुलिस हर व्यक्ति की जांच के पूर्व ब्रेथ एनालाइजर की कैप बदलने का दावा करती है लेकिन डाक्टरों के अनुसार इससे संक्रमण की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं होती है। 

एम्स के कोरोना नोडल पदाधिकारी डा. संजीव कुमार का मानना है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए डाक्टर की देखरेख में पुलिस को ब्रेथ एनालाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। कोरोना संक्रमित कोई व्यक्ति यदि ब्रेथ एनालाइजर में फूंक मारता है और उसके बाद मुंह में रखने वाले हिस्से की कैप बदल भी दी जाएगी तो वायरस अंदर रहेगा। ऐसे में दूसरे व्यक्ति के फूंक मारने के दौरान वह मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश कर सकता है। यही कारण है कि कई राज्यों में अब तक ब्रेथ एनालाइजर के बजाय यूरीन व खून जांच कराकर शरीर में शराब की मात्रा की रिपोर्ट ली जा रही है, हालांकि इसमें रिपोर्ट प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में डाक्टर की निगरानी में ब्रेथ एनालाइजर जांच करना बेहतर उपाय है। 

जांच के समय सावधानी जरूरी  


पीएमसीएच में श्वांस रोग के विभागाध्यक्ष डा. पीके अग्रवाल के अनुसार ब्रेथ एनालाइजर से जांच के दौरान यदि पुलिस और जांच कराने वालों के सावधानी नहीं बरतने पर कोरोना संक्रमण की आशंका रहती है। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि फूंक मारने की रबर कैप लंबी होने के साथ हर बार बदली जाए और संबंधित व्यक्ति अपने रूमाल आदि को उस पर लपेट कर फूंक मारे। बेहतर होगा कि हर व्यक्ति के बजाय अत्यधिक जरूरत होने पर ही यह जांच की जाए।

Edited By: Akshay Pandey