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Bihar News: सैटेलाइट टाउनशिप पर किसानों के सवाल, बोले- जमीन और अधिकारों की कीमत पर विकास मंजूर नहीं

Published: Wed, 07 Oct 2026 12:45 PM (IST)

किसान संगठनों ने पटना में बिहार की 11 प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 पर सवाल ...और पढ़ें

सैटेलाइट टाउनशिप पर किसान सवाल कर रहे है।

सैटेलाइट टाउनशिप पर किसान सवाल कर रहे है।

HighLights

  1. किसान संगठनों ने 11 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं पर सवाल उठाए।

  2. बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई।

  3. पारदर्शिता, उचित मुआवजे और सामाजिक प्रभाव आकलन की मांग की।

राज्य ब्यूरो, पटना। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान संगठनों ने बिहार में प्रस्तावित 11 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 को लेकर कई सवाल उठाए। संगठनों ने दावा किया कि यदि पारदर्शिता, सामाजिक प्रभाव आकलन, उचित मुआवजा, पुनर्वास और किसानों की सहमति सुनिश्चित नहीं की गई तो कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर हस्तांतरण की आशंका बढ़ सकती है।

उनका कहना था कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन किसान की जमीन और आजीविका की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता।

11 शहरों में सैटेलाइट टाउनशिप की योजना पर उठे सवाल

किसान संगठनों के अनुसार पटना, दरभंगा, छपरा, सोनपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मुंगेर और सहरसा में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है।

इसे लेकर बड़े पैमाने पर भूमि चिह्नित किए जाने का दावा किया गया। संगठनों ने कहा कि कृषि भूमि सिर्फ संपत्ति नहीं बल्कि किसान परिवार की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का आधार है।

बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट पर भी जताई आपत्ति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए गए। किसान संगठनों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, सामाजिक प्रभाव आकलन, सहमति, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े मौजूदा प्रावधानों का नए कानून में किस तरह संरक्षण होगा, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जमीन को केवल शहरी विकास के संसाधन के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

लैंड पूलिंग में किसानों को क्या मिलेगा?

लैंड पूलिंग व्यवस्था को लेकर भी किसान संगठनों ने कई सवाल उठाए। उनका सवाल है कि जमीन के बदले किसान को वापस मिलने वाली विकसित जमीन का मूल्यांकन किस आधार पर होगा।

उसे किस स्थान और गुणवत्ता की जमीन मिलेगी और भविष्य में जमीन की कीमत बढ़ने पर किसान को उसका कितना लाभ मिलेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए। संगठनों ने किसानों को विकास प्रक्रिया में वास्तविक साझेदार बनाने की मांग की।

भूमि उपयोग के प्रस्ताव पर मुआवजे का सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भूमि उपयोग के प्रस्तावित अनुपात पर भी सवाल उठाए गए। इसमें सड़क के लिए 22 प्रतिशत तक, बिक्री के लिए 15 प्रतिशत, पार्क-खेल मैदान समेत सुविधाओं के लिए 5 प्रतिशत, कमजोर वर्गों के आवास के लिए 3 प्रतिशत और भू-स्वामियों को वापस दी जाने वाली जमीन के लिए 55 प्रतिशत का उल्लेख होने की बात कही गई। किसान संगठनों ने पूछा कि जमीन के बदले मुआवजा किस फार्मूले से तय होगा।

SIA और सामाजिक ऑडिट की मांग

किसान संगठनों ने बड़े पैमाने पर भूमि उपयोग परिवर्तन से पहले Social Impact Assessment और Social Audit कराने की मांग की।

उनका कहना है कि किसी गांव की कृषि भूमि के शहरीकरण से पहले यह आकलन जरूरी है कि कितने परिवार, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण कारोबारी प्रभावित होंगे। सिंचाई, जल स्रोत, स्थानीय बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का भी अध्ययन होना चाहिए।

BCDA में जनप्रतिनिधित्व को लेकर सवाल

बिहार सिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी BCDA की संरचना को लेकर भी आपत्ति जताई गई। संगठनों ने कहा कि जिस प्राधिकरण को भूमि उपयोग, विकास और नियोजन से जुड़े बड़े अधिकार मिलेंगे, उसमें स्थानीय जनता, निर्वाचित प्रतिनिधियों, किसानों और स्वतंत्र विशेषज्ञों की भागीदारी होनी चाहिए। उनके अनुसार जमीन से जुड़े फैसलों में सार्वजनिक जवाबदेही जरूरी है।

‘सैटेलाइट टाउनशिप नहीं, स्मार्ट गांव चाहिए’

किसान संगठनों ने कहा कि आधुनिक बिहार का मतलब केवल बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं होना चाहिए। उनका जोर स्मार्ट गांव, बेहतर सिंचाई, कृषि, ग्रामीण उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय रोजगार पर है। संगठनों ने आशंका जताई कि यदि कृषि भूमि तेजी से रियल एस्टेट में बदली तो जमीन बेचने वाले परिवारों की भविष्य की नियमित आय प्रभावित हो सकती है।

सरकार से छह प्रमुख मांगें रखीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 को वापस लेने, हर परियोजना का Social Impact Assessment और Social Audit कराने तथा RFCTLARR Act, 2013 के किसान हितैषी प्रावधानों को बनाए रखने की मांग की गई।

इसके अलावा लैंड पूलिंग में किसानों की जमीन, मूल्य और अधिकारों की कानूनी गारंटी, पारदर्शी भूमि मूल्य निर्धारण और सभी सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग रखी गई।

नवंबर में पटना में किसान मार्च का एलान

किसान संगठनों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर एक महीने के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो नवंबर में पटना में किसान मार्च आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। संगठनों के अनुसार यह लड़ाई किसानों की जमीन, आजीविका और अधिकारों से जुड़ी है।

उनका कहना है कि किसान विकास का विरोधी नहीं है, बल्कि ऐसा विकास चाहता है जिसमें उसकी जमीन और आजीविका सुरक्षित रहे।

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