जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले में एक तरफ जहां गरीब तबके के लोग खाद्य सुरक्षा में नाम जुड़वाने के लिए खाद उपभोक्ता विभाग और प्रखंडों के चक्कर लगाने के बाद भी नाम नहीं जुड़वा पा रहे हैं, वहीं कई बंगलाधारी और कई सरकारी कर्मचारी-रिटायर्ड कर्मचारी हर महीने गरीबों को फ्री में मिलने वाले गेहूं व चावल उठा रहे हैं। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि भोजपुर जिले में खाद्य सुरक्षा सूची में 2013 से अभी तक चार हजार 320 सरकारी कर्मचारी अपात्र होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा का लाभ ले रहे हैं। जिनके पास बंगले, बंदूक के लाइसेंस और महंगी गाड़ियां हैं।

इनमें रिटायर्ड कर्मचारी भी शामिल हैं। नगर निगम क्षेत्र वार्डों व गांव में से शायद ही ऐसा कोई वार्ड हो, जहां पर कोई सरकारी कर्मचारी या फिर बंगलाधारी खाद्य सुरक्षा से न जुड़ा हो, सभी वार्डों से अधिकांश लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से जुड़े हुए हैं। दिलचस्प बात है कि खाद्य सुरक्षा सूची से जुड़े सरकारी कर्मियों व बंगलाधारियों ने राशन कार्डों में अपना मोबाइल नंबर तक लिखवा रखा है। जिला प्रशासन ने अब खाद्य सूची में जुड़े अपात्र लोगों का सर्वे शुरू करवा दिया गया है और जल्द ही ऐसे लोगों के नाम सूची से काटे जाएंगे। साथ ही उनसे लिए गए गेहूं और चावल की कीमत भी वसूली की जाएगी। सदर एसडीओ लाल ज्योति नाथ सहदेव ने बताया कि सरकारी कर्मचारी व बंगलाधारी और महंगी गाड़ियां रखने वाले जो लोगों खाद्य सुरक्षा का गैर कानूनी रूप से लाभ उठा रहे है, सघन अभियान चलाकर उनसे रिकवरी किये जाने के निर्देश दिए गए हैं।

सस्ता राशन पाने वालों में सरकारी कर्मचारी भी

खाद्य सुरक्षा सूची में 1420 ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं। जिन्होंने गरीबों का निवाला डकारा है। सरकारी नौकरी वाले इन लोगों की वजह से असल में जरूरतमंद गरीबों तक लाभ नहीं पहुंच पाया। ये ऐसे परिवार हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी के बाद भी गरीबों की सहायता के लिए दिए जानी वाली राहत सामग्री, अनाज का गैरवाजिब लाभ उठाया है। उन्होंने उनसे वसूली जाने वाली राशि के नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। एसडीओ के निर्देशानुसार खाद्य सुरक्षा में जो अपात्र लोग हैं, उनकी जांच का काम किया गया है। जांच में तीन विभागों की टीमें लगी हुई हैं। जिले में ऐसे धनी लोग जिनके पास दो मंजिला मकान है, कार है, इनकम टैक्स पेयर हैं और दो लाख से अधिक की आय रखते हैं। उन सभी लोगो की पहचान की जा रही है।

हर प्रखंड में 50 हजार से अधिक राशन कार्ड

केंद्र और राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सस्ता राशन देने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रही है। मगर राशन माफिया के आगे सभी व्यवस्था फेल हैं। हालांकि फर्जी राशन कार्डों को पकड़ने के लिए सरकार की तरफ से नई योजना चलाई जा रही है। इस जिले में करीब 15 हजार लोगों के फर्जी राशन कार्ड बने हैं। आपूर्ति विभाग के अभिलेखों के अनुसार इस सभी प्रखंड क्षेत्र में 30 से 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के पास राशनकार्ड हैं। 

Edited By: Rahul Kumar