पटना, जेएनएन। बिहार म्यूजियम में टिकट छपाई से लेकर बिक्री में धांधली के आरोपों की अभी जांच चल रही है। इसी बीच वित्तीय अनियमितता के कई और मामले भी सामने आए हैं। सूत्रों की मानें तो फर्जी बिल बनाकर हर महीने हजारों रुपये की निकासी की जाती रही।

म्यूजियम के पुस्तकालय के लिए पुस्तक खरीद से लेकर पेंटिंग स्टैंड तक की खरीद में खेल हुआ है। हद तो यह है कि इस अनियमितता का विरोध करने पर एक लेखापाल पर भी गाज गिर चुकी है। एसएसपी गरिमा मलिक ने बताया कि टिकट छपाई और धांधली मामले की जांच चल रही है। अनुसंधान और साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

अनियमितता का विरोध करने पर नप गए थे लेखापाल

विभागीय सूत्रों की मानें तो धांधली की बुनियाद म्यूजियम के पुस्तकालय से पड़ी। स्टडी रूम को लाइब्रेरी की तरफ बनाना था। इसके लिए बाकायदा पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति भी हुई। सूत्रों की मानें तो अभी तक लाइब्रेरी बनी नहीं मगर बिना बजट के ही 18 लाख रुपये किताब खरीद के नाम पर पास करने की तैयारी शुरू हो गई। कोटेशन और टेंडर तक नहीं हुआ और फाइल भी तैयार हो गई।

कुछ कम्प्यूटर भी लिए गए, जो धूल फांक रहे हैं। किसी तरह इसकी खबर विकास आयुक्त तक पहुंच गई। संबंधित अधिकारी तत्कालीन लेखापाल योगेंद्र पाल पर दबाव बनाने लगे। लेखापाल ने उक्त फाइल पर टेंडर और अन्य नियमों की अनदेखी पर मार्क कर फाइल वापस कर दी। बाद में लेखापाल योगेन्द्र पाल को नौकरी से बाहर कर दिया गया। विभागीय जानकारों की मानें तो इस मामले की अगर सही से ऑडिट हो तो कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।

सघन चेकिंग के बाद मिल रही इंट्री

धांधली की शिकायत के बाद म्यूजियम के गेट पर सुरक्षा के साथ ही चेकिंग बढ़ा दी गई है। बिहार म्यूजियम गेट नंबर एक पर तैनात सुरक्षा कर्मी आने जाने वाले कर्मियों के वाहन से लेकर बैग तक की सघन चेकिंग कर रहे हैं।

सही तरीके से अवकाश का आवेदन नहीं दिए थे युसूफ

अपर आयुक्त दीपक आनंद का कहना है कि बिहार म्यूजियम के निदेशक युसूफ ने सही तरीके से अवकाश का आवेदन नहीं दिया था। इसकी वजह से उनकी छुट्टी स्वीकार नहीं की गई।

Posted By: Akshay Pandey

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