पटना। नवरात्र के दौरान बिहार के कैमूर जिले के प्रसिद्ध मुंडेश्वरी मंदिर में बलि चढ़ाने की परंपरा है। देवी मां से मांगी गई मन्नत जब पूरी हो जाती है तो भक्त यहां बकरे की बलि देते हैं, लेकिन खास बात यह है कि बिना बकरे की जान लिए और बिना खून बहाए ही यहां बलि दी जाती है।

परंपरा के अनुसार मंदिर के पुजारी बलि के बकरे को देवी मां की प्रतिमा के सामने खड़ा कर देते हैं और देवी मां के चरणों में अक्षत अर्पण कर उसी अक्षत को बलि के उस बकरे पर फेंकते हैं। अक्षत फेंकने के बाद बकरा बेहोश हो जाता है और जब बकरा होश में आता है तो उसे लोग अपने घर ले जाते हैं। यहां बलि देने की यह परंपरा सालों से चली आ रही है।

यहां माता भगवती ने अत्याचारी असुर मुंड का किया था वध

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार माता भगवती ने यहीं अत्याचारी असुर मुंड का वध किया था। इसी से देवी का नाम मुंडेश्वरी पड़ा। मुंडेश्वरी मंदिर पंवरा पहाड़ी पर स्थित है। श्रद्धालुओं के अनुसार मां मुंडेश्वरी से सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किया था इस मंदिर का वर्णन

इस मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर है। 608 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने इस मंदिर के विषय में इतिहासकारों का मत है कि इसे 108 ई. में बनवाया गया था। चीनी यात्री ह्वेनसांग 636-38 के यात्रा विवरण में लिखा है कि पाटलिपुत्र से 200 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक चमत्कारपूर्ण देव स्थान है, जिसके शिखर से दिव्य ज्योति निकलती है।

Posted By: Kajal Kumari