विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Bihar Weather: बारिश के आंकड़े सूखे, नदियों के तेवर तीखे; 10 साल में बदला मानसून का मिजाज

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:17 PM (IST)

बिहार में इस बार मानसून ने अजीब स्थिति पैदा की है, जहां सामान्य से 36% कम बारिश हुई है, वहीं ...और पढ़ें

तीन महीने लगातार बारिश में कमी

तीन महीने लगातार बारिश में कमी

HighLights

  1. बिहार में सामान्य से 36% कम बारिश, फिर भी नदियां उफान पर।

  2. गंगा, गंडक, कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा।

  3. असामान्य बारिश वितरण और बाढ़ से खेती पर गंभीर प्रभाव।

प्रभात रंजन, पटना। बिहार में इस बार मानसून ने मौसम का अजीब गणित दिखाया है। एक ओर राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, तो दूसरी ओर गंगा, गंडक, कोसी समेत कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। यानी समस्या सिर्फ बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि बारिश के असमान वितरण और नदियों में ऊपर से आए पानी की भी है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है।

तीन महीने लगातार बारिश में कमी

एक जून से 16 सितंबर तक बिहार में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में सामान्य वर्षा 899.4 मिमी के मुकाबले सिर्फ 577.3 मिमी बारिश हुई।

जून में 46, जुलाई में 42 और अगस्त में 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में खेत पानी के अभाव में प्रभावित हुए, जबकि नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ ने फसलों को डुबो दिया।

10 साल में बदला मानसून का मिजाज

आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में मानसून की बारिश में काफी उतार-चढ़ाव आया है। 2016 से 2025 के बीच सिर्फ 2019, 2020 और 2021 में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई।

वर्ष 2020 में 1272.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 992.2 मिमी था। इसके बाद 2022, 2023, 2024 और 2025 में बारिश सामान्य से कम रही।

बारिश की कमी में कई जिले आगे

शिवहर में सामान्य से 61 प्रतिशत, सीतामढ़ी में 58, जहानाबाद में 57, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में 52-52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

सारण और भागलपुर में भी करीब 50 प्रतिशत की कमी रही। वहीं पूर्णिया में 41 और पटना में 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।

कम बारिश, फिर भी बाढ़ क्यों?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की सबसे बड़ी चुनौती बारिश का असमान वितरण रही। जहां बारिश हुई, वहां कई बार कम समय में ज्यादा पानी गिरा।

दूसरी ओर गंगा और अन्य बड़ी नदियों में ऊपर से आए पानी तथा ऊंचे जलस्तर ने स्थानीय स्तर पर बाढ़ की स्थिति पैदा की। मानसून ट्रफ के बिहार से दूर रहने और मौसमी प्रणालियों के कमजोर रहने से भी वर्षा प्रभावित हुई।

आगे भी बारिश के आंकड़े अहम

बिहार में मानसून सीजन एक जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में अब मानसून की विदाई से पहले बचे दिनों की बारिश महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार में इस मानसून की कहानी सिर्फ कम बारिश की नहीं, बल्कि कम बारिश और अचानक बढ़ते नदी जलस्तर के दोहरे असर की है।

50-70 प्रतिशत कम वर्षा वाले जिले

जिला वास्तविक वर्षा (मिमी) सामान्य वर्षा (मिमी) कमी (%)
शिवहर 320.8 822.2 61
सीतामढ़ी 371.2 888.8 58
जहानाबाद 283.3 665.9 57
दरभंगा 349.1 729.5 52
मुजफ्फरपुर 367.3 768.6 52
सारण 362.8 722.3 50
भागलपुर 386.9 767.3 50

41-50 प्रतिशत कम वर्षा वाले जिले

जिला वास्तविक वर्षा (मिमी) सामान्य वर्षा (मिमी) कमी (%)
पूर्वी चंपारण 475.0 863.9 45
जमुई 418.6 734.7 43
मधुबनी 464.7 811.4 43
पटना 390.7 702.8 44
पूर्णिया 662.7 1127.2 41
सहरसा 465.2 866.5 46
समस्तीपुर 405.9 743.9 45
सारण 362.8 722.3 50
वैशाली 419.9 723.6 42

अवधि: 1 जून से 3 सितंबर | वर्षा मिलीमीटर में

पिछले 10 वर्षों में बिहार की मानसूनी वर्षा

वर्ष वास्तविक वर्षा (मिमी) सामान्य वर्षा (मिमी) अंतर (मिमी)
2025 686.3 992.2 -305.9
2024 798.2 992.2 -194.0
2023 760.5 992.2 -231.7
2022 683.3 992.2 -308.9
2021 1044.5 992.2 +52.3
2020 1272.5 992.2 +280.3
2019 1050.0 992.2 +57.8
2018 771.0 1027.6 -256.6
2017 937.0 1027.6 -90.6
2016 975.0 1027.6 -52.6

नोट: पहले दो टेबल की अवधि 1 जून से 3 सितंबर है। अंतिम टेबल में वर्षवार मानसूनी वर्षा के आंकड़े दिए गए हैं।