Bihar Weather: बारिश के आंकड़े सूखे, नदियों के तेवर तीखे; 10 साल में बदला मानसून का मिजाज
बिहार में इस बार मानसून ने अजीब स्थिति पैदा की है, जहां सामान्य से 36% कम बारिश हुई है, वहीं ...और पढ़ें

तीन महीने लगातार बारिश में कमी
HighLights
बिहार में सामान्य से 36% कम बारिश, फिर भी नदियां उफान पर।
गंगा, गंडक, कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा।
असामान्य बारिश वितरण और बाढ़ से खेती पर गंभीर प्रभाव।
प्रभात रंजन, पटना। बिहार में इस बार मानसून ने मौसम का अजीब गणित दिखाया है। एक ओर राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, तो दूसरी ओर गंगा, गंडक, कोसी समेत कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। यानी समस्या सिर्फ बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि बारिश के असमान वितरण और नदियों में ऊपर से आए पानी की भी है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है।
तीन महीने लगातार बारिश में कमी
एक जून से 16 सितंबर तक बिहार में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में सामान्य वर्षा 899.4 मिमी के मुकाबले सिर्फ 577.3 मिमी बारिश हुई।
जून में 46, जुलाई में 42 और अगस्त में 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में खेत पानी के अभाव में प्रभावित हुए, जबकि नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ ने फसलों को डुबो दिया।
10 साल में बदला मानसून का मिजाज
आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में मानसून की बारिश में काफी उतार-चढ़ाव आया है। 2016 से 2025 के बीच सिर्फ 2019, 2020 और 2021 में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई।
वर्ष 2020 में 1272.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 992.2 मिमी था। इसके बाद 2022, 2023, 2024 और 2025 में बारिश सामान्य से कम रही।
बारिश की कमी में कई जिले आगे
शिवहर में सामान्य से 61 प्रतिशत, सीतामढ़ी में 58, जहानाबाद में 57, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में 52-52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
सारण और भागलपुर में भी करीब 50 प्रतिशत की कमी रही। वहीं पूर्णिया में 41 और पटना में 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।
कम बारिश, फिर भी बाढ़ क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की सबसे बड़ी चुनौती बारिश का असमान वितरण रही। जहां बारिश हुई, वहां कई बार कम समय में ज्यादा पानी गिरा।
दूसरी ओर गंगा और अन्य बड़ी नदियों में ऊपर से आए पानी तथा ऊंचे जलस्तर ने स्थानीय स्तर पर बाढ़ की स्थिति पैदा की। मानसून ट्रफ के बिहार से दूर रहने और मौसमी प्रणालियों के कमजोर रहने से भी वर्षा प्रभावित हुई।
आगे भी बारिश के आंकड़े अहम
बिहार में मानसून सीजन एक जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में अब मानसून की विदाई से पहले बचे दिनों की बारिश महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार में इस मानसून की कहानी सिर्फ कम बारिश की नहीं, बल्कि कम बारिश और अचानक बढ़ते नदी जलस्तर के दोहरे असर की है।
