पटना, जेएनएन। राजधानी में जलजमाव को लेकर नगर निगम, बुडको और नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्यप्रणाली कई दिनों तक सुर्खियों में रही। देश-दुनिया में बिहार की भद्द पिटी। उंगली उठी। विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष के बीच भी जमकर तू-तू, मैं मैं हुआ। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चला। तीखे इल्जामों ने गठबंधन धर्म पर भी सवाल खड़े कर दिए। नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा से ज्वलंत मुद्दों पर दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता रमण शुक्ला ने लंबी बातचीत की है। प्रस्तुत है प्रमुख अंश : 

सवाल-हर साल बारिश होती है। पटना डूबता भी है। एक राजधानी की तरह इसकी हिफाजत की व्यवस्था क्यों नहीं करते हैं?

जवाब : देखिए, प्राकृतिक आपदा पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। पटना के इतिहास में करीब सौ वर्ष बाद इतनी बारिश हुई है। आपदा की स्थिति थी। फिर भी मैं स्वीकार करता हूं कि लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अगर तकनीकी रूप से तैयारियां अच्छी होती तो शायद कम परेशानी होती। बुडको और नगर निगम द्वारा समुचित तैयारी नहीं की गई थी। लापरवाही हुई है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। कई दोषियों पर कार्रवाई हो भी चुकी है।

ताजा प्रकरण से सबक लेकर आगे के मुकम्मल इंतजाम किए जा रहे हैं। राजेंद्र नगर और कंकड़बाग में जहां इलेक्ट्रिक मोटर लगा हुआ है वहां सबमर्सिबल पंप भी लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलजमाव के हालात में मोटर के डूबने पर भी आसानी से पानी निकाला जाए।

राजेंद्र नगर संप हाउस में लीकेज था। इस वजह से पानी निकालने में देरी हुई। किंतु अब सबक के तौर पर बुडको और पटना नगर निगम को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा। पांच डीपीएस (डीजल पंप सेट) एंबुलेंस की खरीद होगी।

पटना में संचालित सभी संप हाउस को बुडको के हवाले किया जाएगा। जलजमाव से संबंधित मुश्किलों से निजात के लिए बुडको और पटना नगर निगम के आला अधिकारियों की समन्वय समिति बनेगी। नगर विकास एवं आवास विभाग समन्वय समिति की मॉनीटरिंग करेगा। सभी प्रमुख नालों से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम ने अभियान शुरू कर दिया है। बुडको को मौजूदा संप हाउस की कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

सवाल : जलजमाव पर भाजपा-जदयू में खूब राजनीति हुई। एक-दो बयान को लेकर आप भी चर्चा में आए। क्या है मामला और कैसे पटाक्षेप हुआ?

जवाब : किसी पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। मीडिया ने हमारी बातों को गलत तरीके से तोड़-मरोड़कर उछाल दिया। नाले की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की थी, जबकि संप हाउस चलाने की जिम्मेदारी बुडको के पास थी, लेकिन बुडको को पानी निकालने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

पाइप लाइन में बार-बार पॉलीथिन फंसने की वजह से संप हाउस सही से काम नहीं कर पाए। फिर बुडको और नगर निगम के बीच समन्वय का अभाव भी रहा। करोड़ों रुपये नाले की सफाई में खर्च किए गए, लेकिन सदुपयोग नहीं हुआ।

जलजमाव के कारणों की पड़ताल में अभी तक दोनों स्तर से निगरानी में लापरवाही का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं पूरे मामले की समीक्षा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने निर्देश दिए हैं। कई जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई है। कुछ अधिकारियों पर आगे भी कार्रवाई होगी।

सवाल-आप मानते हैं कि आपके पहले जिनके पास नगर विकास की जिम्मेवारी थी, उन्होंने ईमानदारी से पटना को बचाने का काम नहीं किया। 

जवाब : पुरानी बातों में जाने की बजाए अब नए सिरे से समाधान निकालना हमारा मुख्य उद्देश्य है। पहले क्या हुआ, क्या नहीं हुआ, क्या होना चाहिए था। इसमें उलझने की बजाए मैं आगे क्या होना चाहिए, इस पर काम कर रहा हूं। उम्मीद है नतीजे भी बेहतर आएंगे।

बुडको और नगर निकायों में मैन पावर पर्याप्त नहीं है। यही स्थिति अन्य नगर निकायों की है। कोशिश है कि जल्द से जल्द मैन पावर की समस्या को दूर किया जाए। पद सृजन का काम पूरा हो गया है। नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। 

सवाल -ठीक है। फजीहत के बाद पटना के मास्टर प्लान की समीक्षा तो की जा रही है, लेकिन क्या गंगा किनारे के अन्य शहरों के लिए इसी तरह का प्लान है? मेरा सवाल भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और बक्सर को लेकर है। 

जवाब : पटना चारों ओर से गंगा, पुनपुन और सोन जैसी नदियों से घिरा है। भारी बारिश के बीच नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। इस वजह से काफी कठिनाई हुई। अब सरकार सभी विकल्प पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री स्वयं चिंतित हैं।

तमाम समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान और विकल्प पर काम शुरू किया गया है। नालों का नए सिरे से मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सवाल- आपकी जिम्मेवारी के ढाई वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। आपके खाते में क्या कोई उपलब्धि है? 

जवाब : नगर विकास एवं आवास का अपना कोई इंजीनियिरंग कैडर नहीं था। इसे ध्यान में रखते हुए टेक्नीकल सेल का गठन विभाग के स्तर पर हुआ है। बड़े पैमाने पर पद सृजन के लंबित काम पूरे किए गए हैं। नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। नगर पालिका नियमावली में संशोधन की तैयारी है। कूड़ा प्रबंधन बड़ी समस्या है। इसके समाधान के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। घर-घर डस्टबिन बांटा गया है।

सात निश्चय योजना के तहत 142 शहरों में पक्की गली-नाली का निर्माण जारी है। हर घर में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा होने को है। जिन घरों में यह सुविधा नहीं मुहैया करा पाए हैं, उनके लिए चलंत शौचालय का प्रावधान किया गया है।

सबके लिए आवास योजना पर काम चल रहा है। गरीब खासकर फुटपाथ व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए काफी काम किए गए हैं। कई प्रमुख शहरों में वेंडिंग जोन बनाकर छोटे कारोबारियों को दुकानें आवंटित की जा रही हैं। 

सवाल-कोई ऐसा काम जिसे आप करना चाह रहे हैं और कर नहीं पा रहे हैं। क्या है वजह। कहीं ऊपर से दबाव तो नहीं? 

जवाब : देखिए जो हम काम करना चाह रहे हैं वह कर रहे हैं। किसी का कोई दबाव नहीं है। हां, बजट की समस्या जरूर आड़े आ रही है। मुख्यमंत्री से बात हुई है। उन्होंने अनुपूरक बजट में फंड देने का भरोसा दिया है। दरअसल, चालू वित्तीय वर्ष में कम बजट मिला था। खासकर नाली निर्माण और बड़े नाले के निर्माण में फंड की समस्या है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है। धीरे-धीरे सारे काम होंगे। योजनाएं तय समय पर पूरी होंगी। 

सवाल-मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव दलीय आधार पर कराने की चर्चा थी। क्या हुआ। प्लान परवान क्यों नहीं चढ़ पाया? 

जवाब : नगर पालिका नियमावली में संशोधन की जरूरत है। इसके लिए संशोधन समिति बनाई गई है। रिपोर्ट जल्द आएगी। काम चल रहा है। कई काम उसी स्तर पर लंबित हैं। विज्ञापन नीति भी लंबित है। नियमावली में संशोधन के साथ ही कई बाधाएं दूर हो जाएंगी। 

सवाल -नगर निगम की कार्यप्रणाली पर जनता ही नहीं, आपकी पार्टी के विधायकों और सांसदों में भी आक्रोश है। क्या कारण है?

जवाब : मैं भी एक जनप्रतिनिधि हूं। आम लोगों को अगर कष्ट होगा तो जनप्रतिनिधियों में नाराजगी लाजिमी है। जनता के सामने जनप्रतिनिधि को ही जाना होता है। उनके प्रति जवाबदेही भी होती है। जब काम नहीं होगा तो आक्रोश होना स्वभाविक है। लेकिन भरोसा देते हैं कि जनता को समस्या से निजात दिलाएंगे। जनप्रतिनिधियों की हर संभव मांग पूरी होगी।

Posted By: Kajal Kumari

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