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CM नीतीश के मंत्री बने असिस्टेंट प्रोफेसर; PPU में पढ़ाएंगे डॉ. अशोक चौधरी? वेतन पर कही ये बात

By Ravi KumarEdited By: vyas Chandra
Published: Mon, 16 Feb 2026 06:06 PM (IST)

Bihar News: ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में योगदान दिया। कुलपति ...और पढ़ें

मंत्री अशोक चौधरी के साथ कुलपत‍ि प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंंह, प्रो. एसपी शाही व अन्‍य। सौ-विभाग

मंत्री अशोक चौधरी के साथ कुलपत‍ि प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंंह, प्रो. एसपी शाही व अन्‍य। सौ-विभाग

HighLights

  1. ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. अशोक चौधरी बने सहायक प्राध्यापक।

  2. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग में योगदान।

  3. नाम विवाद के बाद नियुक्ति, अब मामला सुलझा।

जागरण संवाददाता, पटना। Bihar News: राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री डाॅ. अशोक चौधरी ने सोमवार को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर अपना योगदान दिया।

कुलपति प्रो. उपेेंद्र प्रसाद सिंह ने उन्‍हें पोस्टिंग लेटर सौंपते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी। डाॅ. अशोक चौधरी की पोस्टिंग एएन कालेज, पटना में राजनीति विज्ञान विभाग में की गई है।

मौके पर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति और पीएचडी में उनके गाइड प्रो. एसपी शाही भी मौजूद थे। चौधरी ने आधिकारिक तौर पर पटना के एएन कॉलेज (A.N. College) में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के रूप में अपना योगदान दिया।

वे पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (PPU) के अंतर्गत आने वाले ए.एन. कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक नियुक्त किए गए हैं।

डॉ. चौधरी का चयन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) द्वारा साल 2020 के विज्ञापन के आधार पर जून 2025 में हुआ था।

उनके शैक्षणिक दस्तावेजों में नाम की भिन्नता (अशोक कुमार बनाम अशोक चौधरी) को लेकर शिक्षा विभाग ने पहले आपत्ति जताई थी, जिसे आयोग द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद सुलझा लिया गया।

मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे राजनीति नहीं छोड़ेंगे और सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं बिना वेतन (बिना सैलरी) के देंगे।

सियासी चर्चा का विषय रही नियुक्‍त‍ि 

गौरतलब है कि मंत्री अशोक चौधरी की नियुक्‍त‍ि पर सियासी तूफान खूब मचा था। विपक्ष के हमले पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में स्‍थ‍िति‍ स्‍पष्‍ट की थी। 

उन्‍होंने बताया था कि उनके कुछ सर्टिफिकेट में कमियां पाई गई। पूरे मामले को गहराई से देखा जा रहा है और जो भी अंतर सामने आए हैं, उनकी जांच की जा रही है। जांचोपरांत आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। 

नाम में अंतर बना कारण!

चर्चा यह भी रही क‍ि अशोक चौधरी के दो नाम की वजह से बिहार राज्‍य विश्‍वव‍िद्यालय सेवा आयोग में उनकी नियुक्‍त‍ि अटक गई थी। शैक्षण‍िक प्रमाणपत्रों में उनका नाम अशोक कुमार जबक‍ि चुनावी हलफनामे में अशोक चाैधरी था।  

कांग्रेस प्रवक्‍ता असित नाथ त‍िवारी ने मामले को जोर-शोर से उठाया था। उन्‍होंने मंत्री से पूरे मामले को स्‍पष्‍ट करने की मांग कर दी थी।