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बिहार का खजाना भरेगा 'खनिज', खाते में आएंगे 2643 करोड़ रुपये; इन जिलों की चमकेगी किस्मत!

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:06 PM (IST)

बिहार में खनिज संसाधनों की खोज और दोहन से नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिसमें केंद्र द्वारा 14 ब्लॉक आवंटित किए गए हैं।

गया-औरंगाबाद से रोहतास तक खनिजों का खजाना।

गया-औरंगाबाद से रोहतास तक खनिजों का खजाना।

HighLights

  1. बिहार में 14 खनिज ब्लॉकों का आवंटन, नई संभावनाएं।

  2. गया-औरंगाबाद में यूरेनियम अयस्क मिलने की प्रबल संभावना।

  3. रोहतास के ग्लूकोनाइट ब्लॉकों से ₹2643 करोड़ आय अनुमानित।

डिजिटल डेस्क, पटना। Bihar News: बिहार की जमीन अब राज्य की कमाई का नया जरिया बन सकती है। राज्य में खनिजों की खोज और खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया तेज होने के साथ सरकार को बड़ी आमदनी की उम्मीद जगी है।

अकेले रोहतास के दो ग्लूकोनाइट ब्लॉकों से अगले 50 वर्षों में करीब 2643 करोड़ रुपये की संभावित आय का अनुमान लगाया गया है।

वहीं गया-औरंगाबाद के धनरास क्षेत्र में टिन-टंगस्टन और रेयर अर्थ खनिज के साथ अब यूरेनियम अयस्क मिलने की संभावना ने नई उम्मीद पैदा कर दी है। हालांकि, यूरेनियम को लेकर अभी विस्तृत वैज्ञानिक जांच होनी बाकी है।

रोहतास के दो ब्लॉक से 2643 करोड़ की संभावित कमाई

रोहतास में खनिज से होने वाली संभावित आय का सबसे बड़ा आधार फिलहाल दो ग्लूकोनाइट ब्लॉक हैं। दोनों की नीलामी जुलाई 2024 में हो चुकी है।

पिपराडीह-मुरवा ग्लूकोनाइट ब्लॉक से अगले 50 वर्षों में करीब 1328.66 करोड़ रुपये की संभावित कुल आय का अनुमान है।

यहां खनिज की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच का काम चल रहा है। 24 बोरहोल में से 23 की खुदाई पूरी हो चुकी है और खनिज की जांच की जा रही है।

दूसरा चटिया-नोडहा ग्लूकोनाइट ब्लॉक है। इससे अगले 50 वर्षों में करीब 1314.44 करोड़ रुपये की संभावित आय का अनुमान लगाया गया है।

यहां 37 में से 20 बोरहोल की खुदाई पूरी हो चुकी है। इस तरह इन दोनों ब्लॉकों से ही करीब 2643.10 करोड़ रुपये की संभावित आय का अनुमान है।

यूरेनियम मिला तो बढ़ सकता है आर्थिक महत्व

गया-औरंगाबाद का धनरास क्षेत्र बिहार के लिए आर्थिक लिहाज से और महत्वपूर्ण हो सकता है। यहां टिन-टंगस्टन और रेयर अर्थ खनिज की उपलब्धता के अलावा करीब 150 पीपीएम यूरेनियम अयस्क मिलने की संभावना जताई गई है।

यूरेनियम की मौजूदगी की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए एटॉमिक मिनरल डायरेक्टरेट (एएमडी), जमशेदपुर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्षेत्र में यूरेनियम कितनी मात्रा में है और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल की कितनी संभावना है। पर्याप्त भंडार की पुष्टि होती है तो इस क्षेत्र का आर्थिक और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ सकता है।

तीन और ग्लूकोनाइट ब्लॉक से भविष्य में कमाई की उम्मीद

रोहतास में खनिज आधारित आमदनी का दायरा आगे और बढ़ सकता है। नवाडीह, शाहपुर-अकबरपुर और टिपा ग्लूकोनाइट ब्लॉक को अगली नीलामी में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।

इन ब्लॉकों की नीलामी और आगे खनिज का व्यावसायिक दोहन शुरू होने पर राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना बनेगी।

14 खनिज ब्लॉकों से खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

केंद्र सरकार के खान मंत्रालय ने बिहार में 14 प्रमुख खनिज ब्लॉकों को आवंटित किया है। इनमें गया-औरंगाबाद के धनरास के अलावा अन्य खनिज ब्लॉक भी शामिल हैं।

गया में निकेल-क्रोमियम एवं पीजीआइ ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता घोषित हो चुका है और कंपोजिट लाइसेंस दिया गया है। सपनेरी वैनाडिफेरस-मैग्नेटाइट ब्लॉक के लिए संशोधित जियोलॉजिकल रिपोर्ट भी केंद्र को उपलब्ध कराई जा चुकी है।

यानी आने वाले वर्षों में बिहार की कमाई सिर्फ मौजूदा खनिज ब्लॉकों तक सीमित नहीं रहने वाली है। नए ब्लॉकों की खोज, नीलामी और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के साथ खनिज क्षेत्र से राज्य के राजस्व का दायरा बढ़ सकता है।

खनिज से सिर्फ सरकारी खजाना नहीं, स्थानीय बाजार भी होगा मजबूत

खनिज गतिविधियां बढ़ने का फायदा सिर्फ सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं रहेगा। जिन इलाकों में खनन और उससे जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी, वहां परिवहन, मजदूरी, मशीनरी, निर्माण, होटल, दुकान और दूसरी स्थानीय सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।