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बिहार में फर्जी तरीके से दाखिल-खारिज पर होगा एक्शन, भूमि सुधार मंत्री जायसवाल की सख्त चेतावनी

Published: Wed, 10 Jun 2026 06:21 AM (IST)

राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बिहार में फर्जी निबंधन के आधार पर दाखिल-खारिज की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

मंत्री दिलीप जायसवाल की अधिकारियों संग बैठक। फाइल फोटो

मंत्री दिलीप जायसवाल की अधिकारियों संग बैठक। फाइल फोटो

HighLights

  1. फर्जी दाखिल-खारिज पर मंत्री ने दी सख्त चेतावनी।

  2. अभियान बसेरा-2 के तहत भूमिहीनों को मिलेगी वासभूमि।

  3. भूमि विवाद या दखल-कब्जा न होने पर आवेदन खारिज।

राज्य ब्यूरो, पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा है कि राज्य के कई जिलों में फर्जी निबंधन के आधार पर दाखिल-खारिज करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। निबंधन विभाग द्वारा ऐसे मामलों की रिपोर्ट किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है, यह स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

मंत्री ने मंगलवार को 10 वें दिन वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से नालंदा, खगड़िया एवं समस्तीपुर जिले के राजस्व कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अभियान बसेरा-2 राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी पात्र भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जाए।

राजस्व कार्यों के निष्पादन में आने वाली तकनीकी समस्याओं पर मंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में जानकार कर्मियों की एक टीम गठित कर तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकता है।

विभाग के सचिव जय सिंह, विशेष सचिव इनायत खान एवं अपर सचिव प्रशांत सीएच ने विभिन्न राजस्व कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई निर्देश दिए। अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, आजीव वत्सराज, विशेष कार्य पदाधिकारी मणिभूषण किशोर, सहायक निदेशक जूही कुमारी, आइटी मैनेजर आनंद शंकर समेत अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

दखल-कब्जा नहीं होने पर खारिज हो सकता है आवेदन

भूमि पर शांतिपूर्ण दखल-कब्जा नहीं होने, भूमि विवाद या न्यायालय में मामला लंबित रहने जैसी स्थितियों में दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत हो सकता है। इस संबंध में सिवान एडीएम राजस्व प्रमोद कुमार ने बताया कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है।

उन्होंने बताया कि भूमि खरीदने से पहले संबंधित जमीन की स्थिति, स्वामित्व, विवाद और न्यायालयीन मामलों की पूरी जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। इससे बाद में होने वाली परेशानियों और आवेदन अस्वीकृति की संभावना काफी कम हो जाती है।

एडीएम ने कहा कि आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खरीदी गई भूमि पर आवेदक का शांतिपूर्ण दखल-कब्जा हो। यदि भूमि विवादित है या किसी न्यायालय में विचाराधीन है, तो दाखिल-खारिज प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में आवेदन अस्वीकृत होने की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि भूमि खरीदने से पहले विक्रेता से सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच करें तथा राजस्व अभिलेखों का अवलोकन अवश्य करें। साथ हीं अपनी भूमि की सीमाओं का निर्धारण यथासंभव चहारदीवारी, स्तंभ या अन्य वैध माध्यमों से कराएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भूमि संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग का उद्देश्य है कि लोगों को भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक परेशानी न हो और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

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