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बिहार जमीन सुधार बिल: खेत पर उद्योग लगाना होगा आसान, मगर म्यूटेशन के लिए ढीली करनी होगी जेब

Published: Mon, 20 Jul 2026 06:35 PM (IST)

विधानसभा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दो विधेयक पेश किए, जिनमें से एक कृषि भूमि रूपांतरण शुल्क हटाकर ...और पढ़ें

खेत पर उद्योग लगाना हुआ आसान, मगर म्यूटेशन के लिए ढीली करनी होगी जेब (AI Generated Image)

खेत पर उद्योग लगाना हुआ आसान, मगर म्यूटेशन के लिए ढीली करनी होगी जेब (AI Generated Image)

HighLights

  1. राजस्व विभाग ने विधानसभा में दो भूमि विधेयक पेश किए।

  2. कृषि भूमि रूपांतरण शुल्क हटाकर रैयतों को राहत मिलेगी।

  3. दाखिल-खारिज के हर आवेदन पर 200 रुपये शुल्क लगेगा।

राज्य ब्यूरो, पटना। विधानसभा में सोमवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से पेश दो विधेयकों में से एक में तो रैयतों को राहत देने का प्रयास किया गया है, लेकिन दूसरे में बोझ बढ़ा दिया गया है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवान ने दोनों विधेयकों को पेश किया।

दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसमें किए गए प्रविधान राज्य में कानून बन कर लागू हो जाएंगे। बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक 2026 में किए गए प्रविधानों से रैयतों को लाभ होगा।

पहले कृषि भूमि के व्यवसायिक या औद्योगिक उपयोग करने के एवज में रैयतों को शुल्क देना पड़ता था। इसके अलावा, सरकारी कार्यालयों का भी चक्कर लगाना पड़ता था।

यहां तक कि अगर सरकार भी जमीन अधिग्रहण के बाद अगर उसका गैर-कृषि कार्य के लिए उपयोग करती थी तो उसे भी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।

डॉ. जायसवाल ने कहा कि नए विधेयक के पारित होते ही इससे संबंधित 2010 का अधिनियम निरस्त हो जाएगा। उन्होंने सदन को बताया कि वर्तमान अधिनियम के कारण तीव्र औद्योगिकीकरण के रास्ते में बाधा उत्पन्न हो रही थी, इसलिए उसे निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

डॉ. जायसवाल ने सोमवार को ही बिहार भूमि दाखिल खारिज (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसमें दाखिल-खारिज की हरेक याचिका पर दो सौ रुपया शुल्क लगाने का प्रविधान किया गया है।

यह दाखिल खारिज याचिका, अपील और पुनरीक्षण के आवेदनों पर लागू होगा। यह राशि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के खाते में जमा होगी। इन याचिकाओं पर न्यायालय फीस के रूप में स्टाम्प शुल्क लेने का प्रविवधान पहले से है। दाखिल-खारिज पर दो सौ रुपये का शुल्क नया है।

विधेयक में कहा गया है कि राज्य सरकार विशेष या सामान्य आदेश के माध्यम से शुल्क में संशोधन भी कर सकती है।

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