राज्य ब्यूरो, पटना : सरकार ने पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के जरिए देश के विभिन्न शहरों से गांव लौटे कामगारों को रोजगार मुहैया कराने कवायद शुरू कर दी है। पंचायत प्रतिनिधियों के जरिए लॉकडाउन में लौटे कामगारों का डाटा जिलों को जुटाने का निर्देश दिया गया है। 31 मई तक कामगारों को रोजगार से जोडऩे के लिए सरकार के निर्देशानुसार विशेष अभियान चलाया जाएगा। 

योजनाओं में प्राथमिकता के आधार काम

आत्मनिर्भर बिहार सात निश्चय-2 के तहत पक्की गली-नाली योजना और अन्य योजनाओं में प्राथमिकता के आधार काम देने का निर्देश दिया गया है। कामगारों को उनके प्रखंड और नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों में रोजगार देने की योजना बनी है। कोशिश है कि कोरोना काल में घर लौटने वाले कामगारों सरकार की कोशिश है कि घर के आसपास ही कामगारों जीवन यापन सही ढंग से चल सके।

सड़क निर्माण सहित अन्य विकास योजनाओं में नौकरी

उधर, ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा गांवों में बनने वाली सड़क निर्माण सहित अन्य विकास योजनाओं में काम देने की तैयारी की जा रही है। निर्माण कार्य करने वाली बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों को भी बाहर से आए कामगारों को काम देने का निर्देश जारी किया गया है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में विशेष निर्देश दिया है कि काम मांगने वाले लोगों को विकास योजनाओं में काम मुहैया कराएं।

शासन कर रहा लगातार मॉनीटरिंग

पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने डीएम, डीडीसी और पंचायती राज अधिकारियों को विकास योजनाओं में प्रवासी कामगारों को रोजगार दिलाने की प्रक्रिया का निरंतर मॉनीटरिंग करने का निर्देश दिया है। अहम यह है कि मीणा स्वयं बारीकी से सरकार के निर्देशों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। योजनाओं की प्रगति के साथ पंचायतों को पांचवें व छठे वित्त आयोग के विकास योजनाओं के लिए राशि भेजी जाएगी। मनरेगा के तहत गांवों में संचालित विकास कार्यों में भी जोड़ा जा रहा है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि काम मांगने वाले सभी प्रवासियों को शीघ्र ही काम उपलब्ध कराएं।