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अभी दोषी साबित नहीं, फिर भी जेल में बंद हैं 43 हजार से अधिक कैदी; बिहार की यह तस्वीर चौंकाने वाली

Published: Thu, 22 Oct 2026 07:20 AM (IST)

बिहार की जेलों में 83% कैदी विचाराधीन हैं, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है, कुल 52,197 कैदियों में से 43,300 से अधिक पर अभी तक दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

बिहार की जेलों में 83 प्रत‍िशत कैदी व‍िचाराधीन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

बिहार की जेलों में 83 प्रत‍िशत कैदी व‍िचाराधीन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. बिहार की जेलों में 83% कैदी विचाराधीन हैं।

  2. कुल 52,197 कैदियों में 43,300 से अधिक विचाराधीन।

  3. 'न्यायश्रुति' ऑनलाइन प्रणाली से मुकदमों का त्वरित निपटारा।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य की जेलों में करीब 83 प्रतिशत विचाराधीन कैदी बंद हैं। यानी ऐसे कैदी जिन्हें अभी दोषी सिद्ध नहीं किया गया है और जिनका मुकदमा अभी अंडर ट्रायल है।

भारत सरकार के नेशनल प्रिजन्स इंफार्मेशन पोर्टल (NPIP) के अनुसार, विचाराधीन कैदियों के मामले में बिहार देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। यह राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। राष्ट्रीय औसत 75 प्रतिशत के आसपास है।

जानकारी के अनुसार, राज्य की 60 जेलों में 52,197 कैदी हैं। इनमें 43 हजार 300 से अधिक कैदी विचाराधीन हैं। इन कैदियों के मुकदमे जांच, चार्जशीट, ट्रायल या अपील स्तर पर लंबित हैं।

मुजफ्फरपुर जेल में सबसे ज्‍यादा सजायाफ्ता कैदी

जेलों में बंद करीब 8,800 कैदियों को ही न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई गई है। पोर्टल के अनुसार, मुजफ्फरपुर स्थित शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में सबसे अधिक 998 दोषसिद्ध कैदी हैं।

इसके बाद मोतिहारी केंद्रीय कारा में 924, और पटना के बेउर में 892 दोषसिद्ध कैदी हैं। विचाराधीन कैदियों के मामले में पटना के आदर्श केंद्रीय कारा बेउर का नाम सबसे ऊपर हैं। बेउर जेल में 3547 जबकि मोतिहारी केंद्रीय कारा में 2711 विचाराधीन कैदी बंद हैं।

ट्रायल में तेजी लाने के लिए न्यायश्रुति लागू करने की तैयारी

राज्य में लंबित मुकदमों के जल्द निष्पादन के लिए जल्द ही आनलाइन कोर्ट ट्रायल की प्रणाली 'न्यायश्रुति' को शुरुआत करने की तैयारी है। पटना में न्याय श्रुति प्रणाली के वीडियो ट्रायल का ट्रायल भी सफल रहा है।

गवाही के स्तर पर केस लंबित रहने के मामले को देखते हुए सरकारी गवाहों पर भी सख्ती बरती जा रही है। दो बार नोटिस के बावजूद सरकारी गवाह हाजिर नहीं होते हैं, तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का निर्देश गृह विभाग के स्तर से दिया गया है।