बिहार में बढ़ता ITC घोटाला, गिरफ्तारी सिर्फ दो; 85 करोड़ से 1162 करोड़ पहुंची हेराफेरी
बिहार में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 361 ...और पढ़ें

तीन साल में 85 करोड़ से 1162 करोड़ पहुंची हेराफेरी
HighLights
बिहार में तीन साल में 361 ITC धोखाधड़ी मामले दर्ज।
धोखाधड़ी की राशि 85 करोड़ से बढ़कर 1162 करोड़ हुई।
पूरे देश में 718, बिहार में केवल दो गिरफ्तारियां हुईं।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) में हेराफेरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन गिरफ्तारी के आंकड़े बेहद कम हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बिहार में आइटीसी धोखाधड़ी के 361 मामले सामने आए और इनमें केवल दो लोगों की गिरफ्तारी हुई।
खास बात यह है कि दोनों गिरफ्तारियां पिछले वित्तीय वर्ष में हुईं। वहीं, इसी अवधि में पूरे देश में 718 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
तीन साल में 85 करोड़ से 1162 करोड़ पहुंची हेराफेरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में 2023-24 में आइटीसी धोखाधड़ी के 59 मामले सामने आए थे और इसमें 85.60 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
2024-25 में मामले बढ़कर 101 और राशि 347.12 करोड़ रुपये हो गई। 2025-26 में मामले बढ़कर 201 हो गए और हेराफेरी की राशि 1162.53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
देश में 718 गिरफ्तारियां, बिहार में सिर्फ दो
पूरे देश में 2023-24 में आइटीसी धोखाधड़ी के 9190 मामले सामने आए और 182 गिरफ्तारियां हुईं। 2024-25 में 15283 मामले और 178 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं।
2025-26 में मामलों की संख्या बढ़कर 30162 और गिरफ्तारी 358 तक पहुंची। तीन वर्षों में देश में कुल 718 गिरफ्तारियां हुईं, जबकि बिहार में यह संख्या सिर्फ दो रही।
अब जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म होने की तैयारी
इस बीच जीएसटी अधिकारियों को कारोबारियों को सीधे गिरफ्तार करने की शक्ति देने वाले प्रविधान में बदलाव की तैयारी चल रही है।
सात अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में जीएसटी काउंसिल के समक्ष इस मुद्दे पर सहमति ली जानी है। इसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र में कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है।
करीब नौ साल में कई बार बदले जीएसटी के नियम
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी करीब नौ वर्ष पहले लागू हुआ था। इसके बाद कर व्यवस्था को सरल और सहज बनाने के उद्देश्य से नियमों में कई बार बदलाव किए गए।
इसके बावजूद कर चोरी और आइटीसी में हेराफेरी के मामले कम नहीं हुए। जांच के दौरान कई मामले सामने आते रहे हैं।
बोगस फर्मों से लेकर फर्जी बिलिंग तक का खेल
आइटीसी धोखाधड़ी में बोगस फर्मों और फर्जी बिलिंग का इस्तेमाल प्रमुख तरीके के रूप में सामने आया है। पंजीकरण के शुरुआती चरण में भौतिक सत्यापन की कमी का लाभ उठाकर फर्जी फर्में खड़ी की जाती हैं।
कई मामलों में सीधे-साधे लोगों के दस्तावेज नौकरी या छोटे ऋण का लालच देकर हासिल कर उनके नाम पर कंपनियां खोल दी जाती हैं।
कबाड़ से लेकर स्टील तक में नकद लेन-देन का फायदा
कबाड़, कोयला, लोहा, स्टील और अलकतरा जैसे क्षेत्रों में नकद लेन-देन की अधिकता का भी जालसाज फायदा उठाते हैं। फर्जी बिलिंग के जरिये आइटीसी का दावा किया जाता है।
कई मामलों में लंबे समय तक शून्य रिटर्न दाखिल करने वाली फर्मों के नाम पर बैकएंड में करोड़ों रुपये के ई-वे बिल और फर्जी आइटीसी का खेल चलता रहता है।
बिहार में 50 से अधिक शेल फर्मों पर कार्रवाई
बिहार में कर चोरी के बढ़ते मामले राजस्व के लिहाज से चिंता बढ़ा रहे हैं। हालांकि, टैक्स चोरी करने वालों और शेल कंपनियों के सिंडिकेट पर कार्रवाई भी लगातार जारी है।
पिछले कुछ महीनों में 50 से अधिक ऐसी फर्मों का पता लगाया गया है, जो कागजों पर मौजूद थीं और इनके जरिये करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही थी।
क्या है आइटीसी, कैसे होता है इसका इस्तेमाल
आइटीसी यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट में सामान या सेवा की खरीद पर चुकाए गए जीएसटी को बिक्री पर बनने वाली जीएसटी देनदारी से घटाने की सुविधा मिलती है।
उदाहरण के तौर पर किसी व्यापारी ने कच्चा माल खरीदते समय 1000 रुपये जीएसटी दिया और तैयार माल बेचने पर उसकी जीएसटी देनदारी 3000 रुपये बनी तो वह पहले दिए गए 1000 रुपये को घटाकर 2000 रुपये जीएसटी जमा करेगा। यही 1000 रुपये उसका आइटीसी है।
गिरफ्तारी प्रविधान में बदलाव से क्या बदलेगा
आइटीसी धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच गिरफ्तारी के प्रविधान में बदलाव को कारोबारियों के लिए अनुपालन और कारोबारी माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, कर चोरी रोकने और फर्जी आइटीसी नेटवर्क पर कार्रवाई की चुनौती बनी रहेगी। ऐसे में बोगस फर्मों, फर्जी बिलिंग और शेल कंपनियों के नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
