बिहार के कॉलेजों में अब ग्रीन एनर्जी की पढ़ाई, EV-सोलर और बैटरी टेक में मिलेंगे रोजगार के बड़े मौके
नई शिक्षा नीति के तहत बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में ग्रीन एनर्जी पाठ्यक्रम लागू किए जाएंगे।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में हरित ऊर्जा पाठ्यक्रम लागू होंगे।
पाठ्यक्रम आईआईटी-एनआईटी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए गए हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा, स्थिरता और शोध पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दीनानाथ साहनी, पटना। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद बिहार में उच्च शिक्षा का परिदृश्य एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
पारंपरिक इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्स के बीच अब ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी , रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी साइंसेज जैसे पाठ्यक्रम छात्रों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
इसे देखते हुए बिहार सरकार द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में अब ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) पाठ्यक्रमों को लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है।
नए पाठ्यक्रमों को उद्योग जगत में रोजगार की बढ़ती मांग को देखते हुए आइआइटी एवं एनआइटी के विशेषज्ञों की मदद से पूरी तरह डिजाइन किया गया है। इन पाठ्यक्रमों पर शिक्षकों और विद्यार्थियों को शोध कार्य करने के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
विभाग ने यूजीसी की गाइडलाइन का हवाला देते हुए ग्रीन एनर्जी पाठ्यक्रमों को लागू कराने हेतु आवश्यक तैयारी करने संबंधी निर्देश दिया है। ग्रीन एनर्जी पाठ्यक्रम को संचालित करने के लिए विश्वविद्यालयों में अलग से विभाग भी स्थापित करने का प्रस्ताव है।
पाठ्यक्रम में स्नातक एवं मास्टर डिग्री का प्रविधान किया गया है, जिसमें ऊर्जा के प्रबंधन, कार्बन ट्रेडिंग और सस्टेनेबल बिजनेस माडल से जुड़े पाठ्यक्रम होंगे।
इन पाठ्यक्रमों पर फोकस
प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी), सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी), पवन ऊर्जा प्रबंधन (विंड एनर्जी मैनेजमेंट), ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी , इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी टेक्नोलॉजी, कार्बन एकाउंटिंग एंड आडिटिंग, ग्रीन कारपोरेट वर्ल्ड, ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड बैटरी मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है।
इसका उद्देश्य ग्रीन इनर्जी को सिर्फ इंजीनियरिंग की पढ़ाई तक सीमित नहीं रखना है। इसमें पर्यावरण कानून, ऊर्जा नीति और एनर्जी ऑडिट की पढ़ाई भी कराई जाएगी, ताकि विद्यार्थी इसके व्यावहारिक व व्यावसायिक पहलुओं को समझ सकें।
शार्ट टर्म कोर्स का भी प्रस्ताव
डिग्री और मास्टर डिग्री के अलावा ग्रीन एनर्जी पाठ्यक्रम के शार्ट टर्म यानी डिप्लोमा कोर्स भी लागू किए जाएंगे। इसमें सोलर पैनल इंस्टालेशन, ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन और एनर्जी आडिटिंग में स्किल-बेस्ड कोर्स होंगे।
ग्रीन एनर्जी पाठ्यक्रम के मुख्य विषय के रूप में सौर फोटोवोल्टिक एवं थर्मल तकनीक, बायो-मास और बायो-फ्यूल एनर्जी, हाइड्रोजन ऊर्जा और फ्यूल सेल, ग्रिड इंटीग्रेशन और स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी जैसे विषय भी होंगे।
ग्रीन इनर्जी में शोध कार्य
नई तकनीकों को विकसित करने और मौजूदा तकनीकों की लागत कम करने के लिए ग्रीन एनर्जी पर गहन शोध कार्य को बढ़ावा एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्नत ऊर्जा भंडारण शोध के प्रमुख क्षेत्र होंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग करके बिजली की खपत का अनुमान लगाना और पावर ग्रिड का कुशलता से प्रबंधन कैसे हो, इसपर भी शोध कार्य कराए जाएंगे।
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