बिहार में हार्ट अटैक के साथ रूमेटिक हार्ट डिजीज भी बढ़ा रही चिंता, विशेषज्ञों ने बताए जोखिम और बचाव के उपाय
बिहार में हार्ट अटैक के साथ रूमेटिक हार्ट डिजीज भी चिंता का विषय है, जिस पर विशेषज्ञों ने समय पर उपचार और बचाव के उपायों पर जोर दिया है।

सावधानी बरतने से दूर रहेगी हृदय की बीमारियां। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
हार्ट अटैक में शुरुआती समय में उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बिहार में रूमेटिक हार्ट डिजीज भी एक बड़ी चिंता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नियमित हृदय जांच कराएं।
जागरण संवाददाता, पटना। सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या बेचैनी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां कैथ लैब और प्राइमरी एंजियोप्लास्टी की सुविधा उपलब्ध हो।
समय पर उपचार से जान बचाने के साथ हृदय को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर कार्डियोलाजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI), बिहार चैप्टर की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में विशेषज्ञों ने हृदय को स्वस्थ रखने और हृदय रोग के लक्षणों को समय पर पहचानने की अपील की।
हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 24 घंटे अहम
इस वर्ष 29 सितंबर को मनाए जा रहे विश्व हृदय दिवस की थीम ‘डोंट मिस ए बीट’ (दिल की एक भी धड़कन को नजरअंदाज न करें) है।
सीएसआई बिहार चैप्टर के अध्यक्ष व एम्स पटना के कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ. संजीव कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य हृदय रोग के छिपे संकेतों को पहचानना और समय पर उपचार की दिशा में कदम उठाना है।
उन्होंने बताया कि हृदय सामान्यतः प्रति मिनट करीब 72 बार धड़कता है। धड़कन में किसी भी तरह की असामान्यता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जेपी गोलंबर से गांधी मैदान तक होगी जागरूकता दौड़
हृदय स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मंगलवार सुबह छह बजे ‘वर्ल्ड हार्ट डे रन’ आयोजित होगी। यह जेपी गोलंबर से शुरू होकर गांधी मैदान तक जाएगी।
इसमें मेडिकल छात्र, नर्स, हृदय रोग विशेषज्ञ और आम नागरिक भाग लेंगे। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अरविंद कुमार ने कहा कि हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
सीने में दर्द या हार्ट अटैक के लक्षण होने पर मरीज को तुरंत कैथ लैब वाले अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां प्राइमरी एंजियोप्लास्टी की सुविधा हो।
बीपी और मधुमेह को रखें नियंत्रित
सीएसआइ के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. वीरेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
फोर्ड हास्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. बीबी भारती ने संतुलित खानपान, कोलेस्ट्राल नियंत्रण और नियमित व्यायाम को जरूरी बताया।
डाॅ. यूसी शामल ने कहा कि परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हृदय जांच कराने की सलाह दी।
बिहार में रूमेटिक हार्ट डिजीज भी चिंता
हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. अजय सिन्हा ने बताया कि बिहार में कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक के साथ रूमेटिक हार्ट डिजीज के मामले भी सामने आ रहे हैं।
खराब स्वच्छता, कुपोषण और कम प्रतिरोधक क्षमता इसके जोखिम को बढ़ा सकती है। डाॅ. विपिन कुमार ने बताया कि आधुनिक कैथ लैब तकनीक से स्टेंट प्रत्यारोपण सहित कई हृदय रोगों का उपचार संभव है।
विशेषज्ञों ने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, जोखिम कारकों को नियंत्रित रखने और हृदय से जुड़े असामान्य लक्षणों पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
