दरभंगा रानी की संपत्ति होगी सरकारी, जमीन अधिग्रहण की तैयारी तेज
बिहार सरकार दरभंगा राज की संपत्ति का अधिग्रहण करने की तैयारी में है, क्योंकि अंतिम महारानी कामसुन्दरी देवी का निधन ...और पढ़ें

दरभंगा राजमहल। फाइल फोटो
HighLights
सरकार दरभंगा राज की संपत्ति का अधिग्रहण करेगी।
महारानी कामसुन्दरी देवी का निधन बिना संतान हुआ।
बेतिया राज की 7272 एकड़ जमीन भी सरकारी हुई।
राज्य ब्यूरो, पटना। बेतिया राज की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई। जिसके बाद भी अब दरभंगा राज की संपत्ति पर भी सरकार की नजर है। राज्य सरकार दरभंगा राजा की अंतिम महारानी कामसुन्दरी देवी की संपत्ति के अधिग्रहण की तैयारी कर रही है।
दरभंगा की महारानी के कोई संतान नहीं थी। उत्तराधिकार के बारे में उनकी कोई वसीयत नहीं है और उत्तराधिकार प्रमाणित करने वाला दूसरा कोई दस्तावेज भी नहीं है। इसी आधार पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अधिग्रहण की तैयारी कर रहा है। इसी साल 12 जनवरी को महारानी का निधन हो गया।
विभाग दरभंगा राज की उन संपत्तियों का भी विवरण जुटा जा रहा है, जिनका विधिवत बंटवारा और लाभार्थियों के बीच वैध तरीके से हस्तांतरण नहीं हुआ है।
विभाग ने 10 मई 26 तक आम लोगों से आपत्तियां मांगी थी। आपत्तियों के अध्ययन के बाद सरकार संपत्ति अधिग्रहण के लिए बेतिया राज की तरह अधिनियम बनाएगी।
बेतिया राज की 7272.16 एकड़ जमीन होगी सरकारी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बुधवार को जारी छह अधिसूचनाओं के जरिए 7,272.16 एकड़ जमीन के लिए संबंधित जिलों को अधिकृत कर दिया। विभाग के सचिव जय सिंह के अनुसार यह जमीन गोपालगंज, सारण, सिवान, पटना, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जिलों में है।
पूर्वी चंपारण जिले में इसका रकबा 7,194.56 एकड़ एवं पश्चिम चंपारण में 14.77 एकड़ है। इसके अलावा गोपालगंज में 35.58 एकड़, सारण में 8.47 एकड़, सिवान मेंं 7.29 एकड़ तथा पटना जिले में 11.49 एकड़ जमीन है। सचिव ने बताया कि छह जिलों के लिए अलग-अलग जारी अधिसूचनाओं में संबंधित अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा संख्या तथा रकबा का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि बेतिया राज की संपत्तियां ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक महत्व की धरोहर हैं। राज्य सरकार इन संपत्तियों के व्यवस्थित अभिलेखीकरण, संरक्षण तथा राज्यहित में उनके समुचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि अधिसूचनाएं जारी होने के साथ ही संपत्तियों के राज्य में निहित होने की प्रक्रिया को कानूनी आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।इससे भविष्य में इन परिसंपत्तियों का उपयोग विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। सभी कार्रवाइयां संबंधित जिलों में नियमावली के हिसाब से की जाएंगी।
