पटना, राज्य ब्यूरो। सीओ के तबादले-पदस्थापन में पिछले साल फजीहत झेल चुका राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस बार खास सावधानी बरत रहा है। विभाग के मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा है कि तबादले जरूरत और काम के आधार पर होंगे। वह अपने वायदे पर कायम हैं कि बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को मनचाही पोस्टिंग मिलेगी। खराब काम करने वाले किनारे किए जाएंगे। मंत्री के आदेश के बाद विभाग ने सभी 534 सीओ के कामकाज का मूल्यांकन किया है। कोरोना के चलते विभाग लगभग बंद है। इसलिए सूची पर विचार करने का प्रस्ताव मंत्री के पास नहीं भेजा गया है।

कई चीजों के आधार पर हुआ काम का मूल्‍यांकन

काम का मूल्यांकन परिमार्जन, म्यूटेशन, भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, मापी, लोक भूमि अतिक्रमण, जल निकाय अतिक्रमण मुक्ति अभियान एवं अभियान बसेरा में सीओ की सक्रियता के आधार पर किया गया है। पहले से ही इन कार्यों का मासिक आधार पर मूल्यांकन होता था। लेकिन, मंत्री के कहने पर समग्रता में वार्षिक मूल्यांकन किया गया। वित्तीय वर्ष 2020-21 के मूल्यांकन में मधुबनी जिला के पंडौल के सीओ अव्वल आए हैं। उन्हें सौ में 99.20 अंक मिला है। उनके बाद थावे, इस्माइलपुर, बैकुंठपर, गोपालगंज सदर, मेजरगंज, बलरामपुर, चौसा , रामनगर, अलीनगर, राघोपुर, हुलासगंज मेसकौर आदि के सीओ का नम्बर है। सूची में आखिरी नम्बर पर रोहतास जिला के चेनारी के सीओ हैं। इन्हें सौ में सिर्फ 47.10 नम्बर मिला है।

सदर अंचलों में मिल सकती है तैनाती

राज्य के 534 में से 38 अंचल जिला मुख्यालयों में हैं। इन्हें सदर अंचल कहा जाता है। संभव है कि सूची के टॉप 25 सीओ को सदर अंचलों में तैनाती मिले। खराब काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। सूची की खास बात यह है कि बेहतर काम करने वाले सीओ लगातार अपनी रैंक में बने रहे। जबकि खराब काम करने वालों ने खुद में सुधार नहीं किया। मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा कि उनकी प्राथमिकता काम है। इसके लिए हम अपने वेतन से ईनाम भी दे रहे हैं। लेकिन, कोई भी फैसला कोरोना संकट के समाप्त या कम होने के बाद ही लिया जाएगा।

क्या हुआ था पिछले साल

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पिछले साल सीओ के तबादला को लेकर बड़ा विवाद हो गया था। तत्कालीन मंत्री राम नारायण मंडल की सहमति से तबादलों की सूची जारी हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक यह शिकायत पहुंची कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। यह देखने की जिम्मेवारी मुख्य सचिव को दी गई। मुख्य सचिव ने पूरे मामले की समीक्षा की। शिकायतों को हद तक सही पाया। संशोधन के बाद दूसरी सूची जारी हुई।