राज्य ब्यूरो, पटना : पटना की तर्ज पर राज्य के 17 जिलों में अत्याधुनिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इन जिलों में जमीन चिह्नित कर ली गई है। जिलों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राक्कलन के आधार पर 50 से 75 लाख तक की मान्य राशि की प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। निर्माण कार्य के लिए जिलों में एजेंसी का चयन एवं टेंडर की प्रक्रिया जारी है।

परिवहन विभाग ने दिसंबर-जनवरी तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अत्याधुनिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बन जाने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कैमरे की निगरनी में मशीनों के द्वारा टेस्ट लिया जाएगा। अभी सिर्फ पटना और औरंगाबाद में ही आटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की सुविधा है। सोमवार को परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने वरीय पदाधिकारियों के साथ ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक योजना की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने योजना में तेजी लाने के साथ जिलावार मानीटरिंग का भी निर्देश दिया गया। 

इन जिलों में जमीन चिह्नित

सीतामढ़ी, मोतिहारी, किशनगंज, मधुबनी, पूर्णिया, नालंदा, कटिहार, कैमूर, सारण, बांका, बेतिया, भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, जहानाबाद, नवादा और मधेपुरा।

ऐसा होगा ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक

आटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक में ड्राइविंग टेस्ट के लिए डिवाइडर, जेबरा क्रासिंग, सिग्नल, स्पीड नियंत्रण बोर्ड आदि लगा होगा। इसके अलावा कैमरा और सेंसर भी लगाया जाएगा। गाड़ी चलाने व दाएं-बाएं करने के अलावा गति बढ़ाने और रोकने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, इन सभी मानकों पर अंक दिए जाएंगे। गलती करने पर अंक भी काटे जाएंगे। कंप्यूटर के द्वारा ही पूरी रिपोर्ट तैयार होगी। 

सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी

राज्य में सड़क सुरक्षा के सुरक्षित उपाय के लिए यह पहल की गई है। अभी कई जिलों में दलालों की मिलीभगत से घर बैठे लाइसेंस बनाए जाने के मामले आते रहते हैं। नए ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बन जाने के बाद इस पर रोक लग जाएगी। लाइसेंस उन्हें ही जारी होगा जो पूरी तरह दक्ष होंगे। ऐसे में वाहन हादसों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद है। 

Edited By: Akshay Pandey