मछली पालन में नुकसान की चिंता होगी कम, बीमा प्रीमियम पर बिहार सरकार देगी 1.10 लाख रुपये तक
बिहार सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत जलीय कृषि बीमा को बढ़ावा दे रही है। पात्र किसानों को ...और पढ़ें

बिहार के मछली पालकों के लिए अच्छी खबर। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
मछली पालकों को बीमा प्रीमियम पर 1.10 लाख तक प्रोत्साहन।
बिहार सरकार जलीय कृषि बीमा को दे रही बढ़ावा।
प्राकृतिक आपदाओं और जोखिमों से मिलेगी सुरक्षा किसानों को।
राज्य ब्यूरो, पटना। मछली उत्पादन से जुड़े किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है।
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) बीमा को बढ़ावा दे रही है।
योजना के तहत पात्र किसानों को बीमा प्रीमियम पर अधिकतम 1.10 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। केंद्र सरकार ने देश में एक लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र को एक्वाकल्चर बीमा सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
योजना के तहत एक्वाकल्चर फार्म और तालाबों के साथ-साथ रिकर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), केज, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक मत्स्य पालन प्रणालियों को भी बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
किसानों की जरूरतों के अनुसार बीमा के दो विकल्प उपलब्ध हैं। मूलभूत बीमा के तहत बाढ़, चक्रवात, प्रदूषण, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के जोखिम को कवर किया जाएगा।
वहीं, व्यापक बीमा में इन जोखिमों के अतिरिक्त मछलियों में होने वाले रोगों सहित अन्य जोखिमों को भी शामिल किया जाएगा।
बीमा प्रीमियम पर मिलेगा 40 प्रतिशत प्रोत्साहन
योजना के तहत बीमा पॉलिसी लेने और निर्धारित प्रीमियम का भुगतान करने वाले पात्र सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को प्रीमियम राशि का 40 प्रतिशत एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा।
इससे इन श्रेणियों के पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 1.10 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। बीमा के तहत अधिकतम 20 लाख रुपये तक का बीमा कवरेज उपलब्ध होगा।
हालांकि, अधिक बीमा राशि के लिए निर्धारित दर के अनुसार अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होगा।
चार हेक्टेयर तक जल क्षेत्र को मिलेगा लाभ
एकमुश्त प्रोत्साहन के लिए जल क्षेत्र की पात्रता प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये के हिसाब से निर्धारित की गई है। इसके तहत अधिकतम चार हेक्टेयर वाटर स्प्रेड एरिया तक प्रोत्साहन का लाभ लिया जा सकेगा।
वहीं, आरएएस, केज, बायो-फ्लॉक और रेसवे जैसी गहन जलीय कृषि प्रणालियों के लिए अधिकतम पात्रता सीमा 1,800 घन मीटर निर्धारित की गई है।
इस पहल से मत्स्य पालकों को जोखिम प्रबंधन में मदद मिलेगी और प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से होने वाले नुकसान के आर्थिक प्रभाव को कम करने में सहायता मिलेगी।
बिहार में बढ़ रहा मछली उत्पादन
राज्य में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 7,990 हेक्टेयर नए जल क्षेत्र का सृजन किया गया है। इसके अलावा, 2,721 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण किया गया है और 5,264 ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं।
राज्य में 233 मत्स्य बीज हैचरियां स्थापित हैं, जो मत्स्य बीज की लगभग 70 प्रतिशत जरूरत पूरी कर रही हैं। वर्ष 2025-26 में इन हैचरियों से 2,753.45 मिलियन मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ।
वहीं, राज्य में संचालित 89 फिश फीड मिलों से सालाना 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन हो रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बिहार में मछली उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन हो गया।
