बिहार के खजाने पर बढ़ा खर्च का दबाव, राजकोषीय घाटा 5.82% तक पहुंचा; दो दशक पुराने आंकड़ों से फिर तुलना
बिहार के सरकारी खजाने पर खर्च का दबाव बढ़ा है, जिससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा 5.82% तक पहुंच ...और पढ़ें

चुनावी साल में खर्च बढ़ा तो खजाने पर आया दबाव
HighLights
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा 5.82%।
चुनावी साल में राज्य के खर्च में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।
राज्य 2026-27 में 3% घाटे का लक्ष्य हासिल करने पर केंद्रित।
विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। बिहार के सरकारी खजाने पर खर्च का दबाव एक बार फिर चर्चा में है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दिए गए आंकड़ों में राजकोषीय घाटा 5.82% बताया गया है। यह आंकड़ा राज्य की वित्तीय स्थिति में बढ़ते दबाव की ओर इशारा करता है।
क्रिसिल की 17 बड़े राज्यों की समीक्षा में भी राज्यों के वित्तीय खातों पर बढ़ते दबाव और बाजार से अधिक उधारी की बात सामने आई है।
चुनावी साल में खर्च बढ़ा तो खजाने पर आया दबाव
2025-26 में राज्य के खर्च में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। उपलब्ध बजट दस्तावेजों के विश्लेषण के अनुसार 2025-26 के संशोधित अनुमान में कुल खर्च, कर्ज चुकाने को छोड़कर, 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जबकि बजट अनुमान करीब 2.94 लाख करोड़ रुपये था। इसी दौरान राजकोषीय घाटे का संशोधित अनुमान भी बजट में तय 3% से काफी ऊपर गया।
तीन प्रतिशत के स्तर से ऊपर घाटा क्यों महत्वपूर्ण
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और कर्ज को छोड़कर उसकी कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है। ऐसे में घाटे का बढ़ना राज्य की भविष्य की देनदारियों और ब्याज भुगतान पर भी असर डाल सकता है।
दो दशक पुराने आंकड़ों से हो रही तुलना
दिए गए आंकड़ों में 1994-95 में 3.80%, 2005-06 में 4.62% और 2025-26 में 5.82% राजकोषीय घाटे का उल्लेख है।
इसी वजह से मौजूदा स्थिति की तुलना बिहार के पुराने वित्तीय दौर से की जा रही है। हालांकि अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि आंकड़े बजट अनुमान, संशोधित अनुमान या वास्तविक खाते के हैं।
2022-23 में भी घाटा छह प्रतिशत के पार
बिहार के राजकोषीय आंकड़ों में उतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिला है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में घाटा 5.32%, 2021-22 में 4.60% और 2022-23 में 6.02% रहा। इसके बाद 2023-24 में यह 4.15% और 2024-25 में 4.37% बताया गया है। PRS के वास्तविक खातों के अनुसार 2024-25 में बिहार का राजकोषीय घाटा GSDP का 4.2% था।
अब सवाल खर्च और आमदनी के संतुलन का
राज्य के सामने चुनौती विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च जारी रखते हुए राजस्व और उधारी के बीच संतुलन बनाए रखने की है।
2026-27 के बजट में बिहार ने फिर 3% GSDP के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष में घाटे को नीचे लाने पर जोर दे रही है।
हिसाब बराबर
| वित्तीय वर्ष | राजकोषीय घाटा | सत्ता परिवर्तन |
| 1994-95 | 3.80% | जगन्नाथ मिश्रा से लालू प्रसाद को |
| 2005-06 | 4.62% | राबड़ी देवी से नीतीश कुमार को |
| 2025-26 | 5.82% | नीतीश कुमार से सम्राट चौधरी को |
राजकोषीय घाटा
| 2004-05 | 6.52% |
| 2005-06 | 4.62% |
| 2015-16 | 3.29% |
| 2016-17 | 3.95% |
| 2020-21 | 5.32% |
| 2021-22 | 4.60% |
| 2022-23 | 6.02% |
| 2023-24 | 4.15% |
| 2024-25 | 4.37% |
| 2025-26 | 5.82% |
