बिहार में तीन तलाक के मामले में पहली सजा, शादी के 21 साल बाद पत्नी को तलाक देने पर पति को 2 साल की जेल
bihar first triple talaq बिहार में तीन तलाक रोधी कानून के तहत पहली बार किसी आरोपी को दोषी ठहराया गया ...और पढ़ें

जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त जेल
HighLights
बिहार में तीन तलाक कानून के तहत पहली दोषसिद्धि।
पटना कोर्ट ने नौशाद अहमद को दो साल की सजा सुनाई।
पत्नी को तत्काल तीन तलाक और मारपीट का मामला।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में तीन तलाक रोधी कानून के तहत पहली बार किसी आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है। पटना की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने बिहटा थाना क्षेत्र के सिमरी गांव निवासी नौशाद अहमद को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने से जुड़ा है।
अदालत ने आरोपी को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 341 के तहत भी दोषी पाया। फैसले के साथ अदालत ने शिकायतकर्ता को 6,500 रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया है।
जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त जेल
अदालत के आदेश के मुताबिक, नौशाद अहमद को दो साल की सश्रम कैद भुगतनी होगी। इसके अलावा उसे 6,500 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे एक महीने और 22 दिनों की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
यह फैसला बिहार में तीन तलाक रोधी कानून के तहत पहली दोषसिद्धि के रूप में सामने आया है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों पर अदालत का फैसला एक जैसा नहीं रहा।
तीन तलाक और मारपीट से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद उसे तेजाब से हमला करने के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया गया।
शादी के 21 साल बाद सामने आया विवाद
शिकायतकर्ता रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया की शादी नौशाद अहमद से 9 नवंबर 2001 को हुई थी। दंपती के तीन बच्चे हैं। फुलवारी शरीफ थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, वर्ष 2022 में आरोपी ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की थी।
शिकायत में तेजाब से हमला करने के प्रयास का आरोप भी लगाया गया था। इसके बाद 5 सितंबर 2022 को नौशाद अहमद ने कथित तौर पर अपनी पत्नी को तत्काल तीन तलाक दिया। इसी मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा।
पुलिस जांच के बाद दाखिल हुई थी चार्जशीट
मामले की जांच के बाद पुलिस ने 31 जुलाई 2023 को आरोपपत्र यानी चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने नौशाद अहमद को तीन तलाक रोधी कानून तथा मारपीट और गलत तरीके से रोकने से संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया।
वहीं, तेजाब से हमला करने के प्रयास के आरोप में अदालत को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इस आरोप से आरोपी को बरी कर दिया गया। इस तरह अदालत ने मामले के अलग-अलग आरोपों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा बचाव पक्ष
अदालत के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील शेखर कुमार ने कहा कि तेजाब से हमला करने के आरोप में उनके मुवक्किल के खिलाफ साक्ष्य नहीं थे और इसी कारण उन्हें उस आरोप से बरी किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेश का कानूनी अध्ययन करने के बाद फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से आगे अपील किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल पटना की अदालत ने तीन तलाक रोधी कानून के तहत नौशाद अहमद को दो साल की सजा सुनाई है। बिहार में इस कानून के तहत यह पहला दोषसिद्धि का मामला बताया जा रहा है।
