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    बिहार में 'हाथी पांव' के मरीजों को मिलेगा दिव्यांगता प्रमाण पत्र, ले सकेंगे पेंशन का लाभ

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 07:36 PM (IST)

    पटना में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिलाने और पेंशन का लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सिविल सर्जन ने एमडीए कार्यक्रम के प्रभाव और जागरूकता की आवश्यकता पर बात की। विशेषज्ञों ने भारत में फाइलेरिया की स्थिति और बिहार सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। पटना जिले में हाइड्रोसिल मरीजों के ऑपरेशन की प्रगति भी बताई गई।

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    फाइलेरिया के मरीज। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, पटना। राज्य के चार जिलों पटना, पूर्णिया, बेगूसराय और मोतिहारी में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को और प्रभावी बनाने, मौजूदा अवरोधकों की पहचान करने तथा भविष्य की रणनीति तय करने को लेकर पटना स्थित एक निजी होटल में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

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    यह बैठक एम्स पटना, जिला स्वास्थ्य समिति और वीमेंस लैबोरेटिव फोरम के संयुक्त तत्वावधान में हुई। मुख्य अतिथि सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि सभी योग्य मरीजों की जांच कर उन्हें शीघ्र दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिलाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएं, इससे वे दिव्यांगता पेंशन का लाभ उठा सकें।

    उन्होंने बताया कि एमडीए कार्यक्रम (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) का सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है, पर अब भी समुदाय में फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। सिविल सर्जन ने यह भी कहा कि राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी जीवन में कभी न कभी हाइड्रोसिल से प्रभावित होती है, जो फाइलेरिया संक्रमण का परिणाम है। ऐसे में समुदाय स्तर पर जागरूकता बेहद जरूरी है।

    राज्य फाइलेरिया सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत, विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल को-आर्डिनेटर डॉ. अरुण कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के स्टेट एनटीडी लीड बासब रूज, एम्स के कई विशेषज्ञ, जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारी, आशा कार्यकर्ता, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं फाइलेरिया मरीज उपस्थित रहे।

    भारत में हैं दुनिया के 40 प्रतिशत फाइलेरिया मरीज

    एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. संजय पांडेय ने बताया कि दुनिया के कुल फाइलेरिया मरीजों में से 40 प्रतिशत केवल भारत में हैं। बिहार के सभी 38 जिले इस संक्रमण से प्रभावित हैं।

    राज्य फाइलेरिया सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत ने कहा कि बिहार देश का एकमात्र राज्य है जो एमएमडीपी किट के साथ विशेष चप्पल भी फाइलेरिया मरीजों को उपलब्ध कराता है। पिरामल स्वास्थ्य के बासब रूज ने फाइलेरिया उन्मूलन में अंतर्विभागीय समन्वय को अनिवार्य बताया।

    डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार ने तकनीकी पहलुओं और रणनीतिक दिशा पर विस्तृत जानकारी दी। एम्स पटना के एसोसिएट प्रोफेसर डा. संतोष कुमार निराला ने कहा कि फाइलेरिया एक वैश्विक चुनौती है और भारत में 20 राज्यों के 348 जिले इससे प्रभावित हैं।

    उन्होंने कहा कि बीमारी को समाप्त करने के लिए समुदाय की समस्याओं को समझना और उनका सही प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई ताकि सभी संबंधित पक्ष एकजुट होकर सकारात्मक भूमिका निभा सकें। कार्यक्रम का संचालन डा. विजय नंदा नायक ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संतोष कुमार निराला ने किया।

    पटना में 1500 से अधिक हाइड्रोसिल मरीजों का ऑपरेशन

    जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया कि पटना जिले में अब तक 1500 हाइड्रोसिल मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। शेष चिन्हित मरीजों के ऑपरेशन की तैयारी तेजी से चल रही है।

    उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी मरीजों को एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई जाएगी और स्वास्थ्यकर्मी किट के सही उपयोग का प्रशिक्षण भी देंगे। उन्होंने नाइट ब्लड सर्वे के तहत एकत्रित स्लाइडों को समय पर भेजने के निर्देश भी दिए।