पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Fights Corona बिहार की उपलब्धियों के मूल्यांकन में भेदभाव के आरोप झेल रहे नीति आयोग (NITI Aayog) ने कोरोनावायरस संक्रमण (CoronaVirus Infection) से बचाव के लिए किए गए बेहतर उपायों की तारीफ की है। आयोग ने माना है कि कई मानकों पर कोविड प्रबंधन (COVID Management) में राज्य की नीतीश सरकार (Nitish Government) कामयाब रही। आयोग की नवम्बर की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य ने ऐसे तमाम उपाय किए, जिससे इस महामारी (Corona Pandemic) को रोकने में कामयाबी मिली। कहा गया कि इलाज के लिए बनाए गए केंद्रों पर मरीजों के लिए पारिवारिक माहौल बनाए गए। ऐसी रणनीति बनाई गई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर बिना अतिरिक्त बोझ डाले कारगर चिकित्सा हो सके। हां, मौतों का सही-सही आंकड़ा नहीं जुटाने का ठीकरा भी सरकार के सिर पर फोड़ा।

कंटेंमेंट, आइसोलेशन, दवा व प्रशिक्षण में दिखा समन्वय

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के इलाज के लिए एक मुख्य टीम बनाई गई। कई छोटी-छोटी टीमें बनाई गईं। कंटेंमेंट, आइसोलेशन, दवा, प्रशिक्षण और इन सबके बीच समन्वय की व्यवस्था की गई। संक्रमण प्रमाणित होते ही प्रभावित व्यक्ति को आइसोलेशन में रख कर तुरंत इलाज शुरू किया गया। राज्य सरकार ने पहले चरण में ही मरीजों की पहचान की कोशिश की। होम आइसोलेशन में रखे गए मरीजों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। मेडिकल टीम नियमित तौर पर उनके संपर्क में रही।

गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान, मेडिकल टीम रही अलर्ट

नीति आयोग ने नोट किया कि गंभीर मरीजों को जरूरी सुविधाएं देने के मामले में विशेष मेडिकल टीम तत्पर रही। राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों को कहा गया कि वे मरीज की नियमित जांच करें। किसी की तबीयत अधिक बिगड़ी तो उन्हें एंबुलेंस के जरिए बड़़े अस्पतालों में भेजा गया। कोविड की दूसरी लहर में रोजाना औसत सौ से दो सौ मरीजों को एंबुलेंस के जरिए उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया।

मोबाइल एप व आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका की चर्चा

नीति आयोग ने कोविड प्रबंधन में आशा से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका की भी चर्चा की है। कहा कि राज्य सरकार ने अप्रैल में दूसरी लहर की रोकथाम के लिए प्रोटोकाल तय किया। आशा से जुड़ी कार्यकर्ता उस प्रोटोकाल का पालन कराने में जुटी। वह मेडिसीन कीट लेकर प्रभावित लोगों तक पहुंची। हालांकि, आयोग ने रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया है कि मेडीसीन कीट में पल्स आक्सीमीटर या थर्मामीटर जैसे जरूरी उपकरण नहीं दिए गए। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की देख-रेख के लिए एप बनाया गया। पहले पांच जिलों में इसका प्रयोग हुआ। फिर पूरे राज्य में इसका विस्तार किया गया।

कोरोना से मौतों का सही आंकड़ा नहीं देने की भी चर्चा

आयोग ने होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों के इलाज के लिए तो राज्य की तारीफ की, लेकिन इस अवधि में हुई मौतों का सही-सही आंकड़ा न जुटाने का ठीकरा भी सरकार के सिर फोड़ा। कहा कि ऐसे मामलों में इस स्तर की तकनीक होनी चाहिए, जो मौतों का सही-सही आंकड़ा जुटा सके।

Edited By: Amit Alok