बिहार में फर्जी सिम का साइलेंट नेटवर्क: पांच साल में 38.5 लाख कनेक्शन ब्लॉक
बिहार में साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम कार्ड का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें पिछले पांच वर्षों में ...और पढ़ें

फर्जी सिम कार्ड का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय
शुभम कुमार, पटना। बिहार में साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार अब बंदूक नहीं, बल्कि फर्जी सिम कार्ड बन चुके हैं। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), दूरसंचार विभाग (डीओटी), पटना पुलिस और साइबर थाना की पांच वर्षों की कार्रवाई से यह खुलासा हुआ है कि राज्य में जाली दस्तावेज, बायोमेट्रिक क्लोनिंग और प्री-एक्टिवेटेड सिम के जरिए संगठित नेटवर्क खड़ा किया गया।
अब तक 38.5 लाख संदिग्ध सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं। हर साल कार्रवाई का दायरा बढ़ा है और इसके साथ फर्जी सिम नेटवर्क की गहराई भी उजागर होती गई है।
वर्ष 2021-22 में 6.20 लाख संदिग्ध सिम ब्लॉक हुए थे, जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 20.40 लाख तक पहुंच गया।
साल-दर-साल बढ़ता गया फर्जी सिम नेटवर्क
वर्ष 2022-23 में 9.50 लाख, 2023-24 में 12.80 लाख और 2024-25 में 16.10 लाख सिम बंद किए गए। आंकड़े बताते हैं कि किस तरह साल-दर-साल फर्जी सिम का जाल फैलता गया। जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई के दौरान इन सभी सिम को बंद कराया गया।
हर 10 में सात सिम फर्जी बैंक खातों से जुड़े
ब्लॉक किए गए सिम में 75 प्रतिशत प्री-एक्टिवेटेड पाए गए। जांच में सामने आया कि हर 10 में सात सिम किसी न किसी फर्जी या किराये के बैंक खाते से जुड़े थे।
करीब 65 प्रतिशत सिम केवल 48 से 72 घंटे तक सक्रिय रखे गए, ताकि साइबर ठगी के बाद पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस न कर सके।
इन सिमों का इस्तेमाल ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर, निवेश घोटाले, व्हाट्सएप अकाउंट, रंगदारी और मनी म्यूल नेटवर्क में किया गया।
बायोमेट्रिक क्लोनिंग से जारी हुए हजारों सिम
जांच में कई मामलों में एक ही व्यक्ति की तस्वीर पर 1500 सिम सक्रिय मिले। सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा ग्रामीण इलाकों में सामने आया, जहां सरकारी योजनाओं, मुफ्त रिचार्ज या ई-केवाईसी के नाम पर लोगों के बायोमेट्रिक लेकर अतिरिक्त सिम जारी किए गए।
राज्य का 72 प्रतिशत नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय मिला, जबकि केवल 28 प्रतिशत शहरी इलाकों में संचालित हो रहा था।
10 जिले बने फर्जी सिम नेटवर्क का गढ़
राज्य के कुल नेटवर्क का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा केवल 10 जिलों में मिला है। इनमें पटना 4.80 लाख संदिग्ध सिम के साथ सबसे आगे है।
इसके बाद नवादा (4.20 लाख), नालंदा (3.90 लाख), जमुई (3.50 लाख), गया (3.10 लाख) और मुजफ्फरपुर (2.80 लाख) का स्थान है।
भागलपुर (2.65 लाख), पूर्णिया (2.40 लाख), दरभंगा (2.10 लाख) और बेगूसराय (1.95 लाख) भी सूची में शामिल हैं। सारण, सिवान, रोहतास और कटिहार में भी बड़ी संख्या में संदिग्ध सिम ब्लॉक किए गए।
अब निशाने पर सिम जारी करने वाले वेंडर
कार्रवाई का फोकस अब सिम इस्तेमाल करने वालों से ज्यादा उन्हें जारी करने वाले वेंडरों पर है। पिछले पांच वर्षों में 1200 से अधिक वेंडर ब्लैकलिस्ट किए गए हैं।
कई वेंडरों के लाइसेंस रद्द किए गए और 1.8 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।
गिरफ्तार वेंडरों की संख्या 110 से बढ़कर 820 तक पहुंच गई, जबकि साइबर अपराधियों और सप्लायरों की गिरफ्तारी 240 से बढ़कर 1450 तक हो गई।
एक नजर में
- पांच वर्षों में ब्लॉक किए गए फर्जी सिम: 38.5 लाख
- 2021-22: 6.20 लाख
- 2022-23: 9.50 लाख
- 2023-24: 12.80 लाख
- 2024-25: 16.10 लाख
- 2025-26 (अब तक): 20.40 लाख
- सबसे अधिक प्रभावित जिला: पटना (4.80 लाख)
- नेटवर्क का 65 प्रतिशत केवल 10 जिलों में केंद्रित
- 1200 से अधिक वेंडर ब्लैकलिस्ट
- 1.8 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
- 75 प्रतिशत सिम प्री-एक्टिवेटेड
- हर 10 में सात सिम फर्जी बैंक खातों से जुड़े
- 65 प्रतिशत सिम 48 से 72 घंटे के भीतर इस्तेमाल कर बंद किए गए।
