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    नई शिक्षा नीति लागू करने में बिहार फिसड्डी, छात्रों को नहीं मिल पा रहा UGC की सुविधाओं का लाभ 

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 02:54 PM (IST)

    बिहार की उच्च शिक्षा में नई शिक्षा नीति को लागू करने में विफलता के कारण छात्रों को यूजीसी की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि UGC की नई गाइडलाइन को लेकर अभी पूरी तैयारी नहीं हो पायी है।  

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    छात्रों को नहीं मिल पा रहा NEP का लाभ। फाइल फोटो

    दीनानाथ साहनी, पटना। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को बिहार में लागू करना बड़ी चुनौती है। इसकी बड़ी वजह उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नीति निर्धारकों में एकेडमिक सोच की कमी मानी जा रही है।

    अगले सत्र से जहां अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में साल में दो बार जुलाई/अगस्त और जनवरी/फरवरी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी। छात्र एक सत्र में दो अलग-अलग यूजी-पीजी कोर्स में पढ़ाई कर सकेंगे और दोनों डिग्री वैध होंगी। वहीं, बिहार में छात्रों के लिए इसकी कोई कार्य योजना को लेकर तैयारी नहीं है। 

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    शुरू से ही दिखी उदासीनता

    उच्च शिक्षा के नाम पर सरकार सिर्फ वेतन-पेंशन की राशि विश्वविद्यालयों को दे रही है। देखा जाए तो 2020 में लागू नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर बिहार में शुरुआत से उदासीनता दिखी।

    जब महागठबंधन की सरकार थी, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर ने एनईपी का यह कहकर मजाक उठाया था कि इसमें संघ की सोच है। इसके बाद एनडीए की सरकार बनी तब भी एनईपी के क्रियान्वयन को लेकर कोई ठोस कार्य योजना नहीं बन पायी।

    उच्च शिक्षा निदेशालय से जुड़े एक तेज-तर्रार उपनिदेशक ने स्वीकार किया कि NEP (New Education Policy) को लागू करने में देश के कई राज्य बहुत आगे निकल चुके हैं, लेकिन बिहार में एनईपी का क्रियान्वयन संतोषप्रद नहीं है।

    उनका कहना था कि एनईपी के प्रति गंभीरता को इसी से समझ सकते हैं कि बीते पांच सालों में इस राज्य के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम ही लागू हो पाया है, किंतु अकादमिक सत्र पटना विश्वविद्यालय को छोड़ कर अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में अब भी सत्र का शत-प्रतिशत संचालन दुरुस्त नहीं हो पाया है।

    जाहिर है, राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक माहौल बनाने और एनईपी को प्राथमिकता देने में बरती जा रही उदानीसता से छात्रों को ही खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

    यूजीसी की नई सुविधाओं के लाभ से वंचित होंगे छात्र

    यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अब प्रवेश से मनचाहे कोर्स में छात्रों को प्रवेश पाने की सुविधा दी है। यूजीसी ने स्पष्ट कहा है कि संस्थानों को छात्रों को किसी भी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने और फिर से दाखिला पाने की छूट देनी होगी। वोकेशनल एवं स्किल कोर्स के क्रेडिट को डिग्री कोर्स के क्रेडिट सिस्टम में शामिल करना होगा।

    किसी कोर्स में दाखिले के लिए छात्र योग्य होगा। किंतु, बिहार के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर अभी पूरी तैयारी नहीं हो पायी है। इसलिए अगले सत्र से कितने कोर्स में छात्रों काे दाखिला दिला पाएंगे, यह अभी बता पाना मुश्किल है।

    यानी, स्पष्ट है कि यूजी और पीजी डिग्री के लिए यूजीसी की नई गाइडलाइन को लागू करने में बिहार अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। जबकि, उच्च शिक्षा में छात्रों का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने के लिए यूजीसी ने दाखिले, पढ़ाई, मूल्यांकन और डिग्री मिलने के तौर तरीकों को बेहद लचीला बनाया है।