युवाओं को उद्यमी बनाने में बिहार फिसड्डी, दूसरे राज्यों की तरह क्यों नहीं ले पा रहा ESDP का भरपूर लाभ?
बिहार उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) का लाभ उठाने में अन्य राज्यों से पीछे है, जहाँ पिछले वित्तीय वर्ष में केवल 9138 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बिहार में ESDP के तहत युवाओं का प्रशिक्षण अन्य राज्यों से कम।
उद्यम के प्रति कम रुचि और प्रशासनिक शिथिलता मुख्य बाधाएँ।
स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर से सुधार और रोजगार सृजन की उम्मीद।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार को उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी) का लाभ तो है, लेकिन दूसरे राज्यों की तरह भरपूर नहीं। पिछले वित्तीय वर्ष में इस योजना के अंतर्गत बिहार में मात्र 9138 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या 629784 रही।
उल्लेखनीय है कि युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार सुलभ कराने के लिए हाल ही में केंद्र से बिहार में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना के लिए समझौता हुआ है। इसके जरिये ईएसडीपी को भी बल मिलने की संभावना है।
युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की योजना
ईएसडीपी का मूल उद्देश्य युवाओं को एमएसएमई के लिए प्रशिक्षित कर रोजगारोन्मुखी बनाना है। उन्हें नौकरी चाहने वाले (जाब सीकर्स) के बजाय नौकरी देने वाले (जाब क्रिएटर) के रूप में बदलने का है। इसके लिए महाराष्ट्र-तमिलनाडु आदि अपेक्षाकृत बेहतर पहल कर रहे, जहां पहले से ही औद्योगिक माहौल है।
बिहार में यह कार्यक्रम मध्यम, लघु व सूक्ष्म उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय, उद्यमिता निदेशालय और बिहार कौशल विकास मिशन के समन्वय से चल रहा है।
पटना सहित दूसरे जिलों में भी विश्वकर्मा कारीगरों और युवाओं के लिए तीन-दिवसीय और दीर्घकालिक उद्यमिता विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
आइआइएम बोधगया, सीपेट वैशाली व भागलपुर और चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना जैसे शीर्ष संस्थानों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित किया गया है।
कमतरी के कारण
बिहार में युवाओं की जनसंख्या दूसरे राज्यों की तुलना में अधिक है। ऐसे में यह योजना बिहार के लिए बेहद फलदायी है। बहरहाल बेहतर प्रदर्शन नहीं होने के दो महत्वपूर्ण कारण हैं।
पहला, उद्यम के प्रति लोगों में कम अभिरुचि और दूसरा, औद्योगिक-प्रशासनिक तंत्र की शिथिलिता। अगर इससे उबर गए, तो एमएसएमई और अनिगमित क्षेत्र (अन-कारपोरेट सेक्टर) के उत्थान के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान परिस्थितियों में बिहार में औद्योगिक क्रांति अगर होगी तो एमएसएमई और अन-कारपोरेट सेक्टर के जरिये ही।
योजना में बाधाएं
बड़े उद्योगों और विनिर्माण हब की कमी के कारण प्रशिक्षित युवाओं को स्थानीय स्तर पर खपाना मुश्किल होता है। बैंकों द्वारा स्टार्ट-अप को ऋण देने में की जाने वाली देरी और कागजी औपचारिकताएं आज भी बड़ी बाधा हैं।
तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक उद्योगों (जैसे एआइ, डिजिटल मार्केटिंग) की मांग के बीच एक गैप रहा है, जिसे अब सुधारा जा रहा है।
बेहतर लाभ लेने वाले राज्य
आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश।
निधि का उपयोग भरपूर
पिछले पांच वित्तीय वर्ष (2021-22 से 2025-26 तक) के दौरान इस योजना के लिए 277.02 करोड़ रुपये आवंटित हुए। उनमें से 266.674 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
पांच वर्षों का प्रदर्शन (कार्यक्रम/ लाभार्थी)
| वित्तीय वर्ष | बिहार | भारत |
|---|---|---|
| 2021-22 | 49 / 3929 | 715 / 59702 |
| 2022-23 | 132 / 6079 | 4732 / 218692 |
| 2023-24 | 232 / 12265 | 7497 / 347042 |
| 2024-25 | 288 / 13454 | 12575 / 569961 |
| 2025-26 | 204 / 9138 | 13761 / 629784 |
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