पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Assembly Election 2020: लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) संसदीय बोर्ड ने फिर दोहराया है कि पार्टी बिहार में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी है। बोर्ड ने बुधवार को इस आशय का प्रस्ताव पारित किया और अंतिम फैसले के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) को अधिकृत कर दिया। पटना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की मुलाकात के तत्काल बाद एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने जेडीयू के खिलाफ अपने तेवर नरम किए थे, तो यह समझा जा रहा था कि राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में अब सबकुछ ठीक है। लेकिप बुधवार को एलजेपी संसदीय दल की बैठक में ऐसा कुछ नहीं दिखा। पार्टी ने बिहार में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इसके साथ यह स्‍पष्‍ट हो गया कि एलजेपी चुनाव में जेडीयू के खिलाफ मैदान में उतरेगी। खास बात यह है कि इस बैठक के पहले चिराग पासवान की बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से देर रात मुलाकात हुई थी, लेकिन लगता है कि इसका कोई परिणाम नहीं निकला।

पीछे हटने के मूड में नहीं है एलजेपी

बैठक के पहले चिराग पासवान ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच बिहार चुनाव की रणनीति और सीट शेयरिंग पर चर्चा हुई। एलजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस दौरान चिराग ने बीजेपी को बिहार में और अधिक सीटों पर चुनाव लडऩे का सुझाव दिया। चिराग पासवान ने नड्डा के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की प्रशंसा की, क्योंकि वे बिहार के लिए विभिन्न पैकेज और योजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं। बैठक में चिराग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र के बारे में भी जानकारी दी। माना जा रहा था कि एनडीए के सबसे बड़े दल के प्रमुख से मुलाकात के बाद एलजेपी प्रमुख जेडीयू के खिलाफ अपने तेवर नर्म ही रखेंगे, लेकिन संसदीय दल की बैठक में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर एलजेपी ने यह जताने की कोशिश की कि अभी वह पीछे हटने के मूड में नहीं है।

143 उम्मीदवारों की सूची पर चर्चा शीघ्र

बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक में 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी के बारे में चर्चा हुई। उम्मीदवारों की सूची जल्द ही केंद्रीय संसदीय बोर्ड के समक्ष रखी जाएगी। सांसदों ने पार्टी के गठबंधन पर फैसले और आगे की सभी रणनीति तय करने के लिए चिराग को अधिकृत कर दिया। बैठक में चुनाव में 'बिहार फर्स्‍ट-बिहारी फर्स्‍ट विजन डाक्यूमेंट जारी करने का फैसला लिया गया।

'कालिदास' कहने पर ललन सिंह की निंदा

एलजेपी के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिफ ने बताया कि पार्टी के सांसदों ने बिहार में अफसरवाही पर गहरी चिंता जताई और इससे लड़ने की योजना भी बनाई। सांसदों ने चिराग पासवान को 'कालिदास' कहने पर जेडीयू सांसद ललन सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। साथ में जेडीयू नेता केसी त्यागी के बयान कि जेडीयू का एलजेपी से कोई गठबंधन नहीं है, का स्वागत किया गया।

एससी को तीन डिसमिल जमीन दे सरकार

बैठक में नीतीश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति को पूर्व में किए गए तीन डिसमिल जमीन के वादे को पूरा करवाने की मांग उठी। सभी सांसदों ने यह भी प्रस्ताव बैठक में रखा कि पार्टी को इस बार के चुनाव में कई पत्रकारों को भी टिकट देना चाहिए, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। बैठक में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और सांसद पशुपति कुमार पारस के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को श्रद्धांजलि दी भी गई।

तनावपूर्ण हो गए हैं चिराग व नीतीश के रिश्‍ते

विदित हो कि चिराग पासवान बीते कुछ समय से बिहार सरकार की नाकामियों को गिनाते हुए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को घेरते रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि वे आलोचना नहीं कर रहे, बल्कि मुख्‍यमंत्री तक जनता की बातें पहुंचा रहे हैं। इसे लेकर नीतीश कुमार व चिराग पासवान के रिश्‍ते तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच नीतीश कुमार की पहले पर एनडीए में शामिल हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के अध्‍यक्ष जीतनराम मांझी (Jitanram Manjhi) ने नीतीश कुमार के बचाव में चिराग पासवान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

बिहार के हालात पर पीएम मोदी को लिखा पत्र

बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा के बिहार दौरे के बाद चिराग के तेवर नरम पड़ते दिखे थे। उन्‍होंने नीतीश कुमार के नेतृत्‍व पर भरोसा जताया था। लेकिन इसके बाद 13 सितंबर को चिराग ने बिहार की गेंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाले में डाल दिया। चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पार्टी और संसदीय बोर्ड की भावना से अवगत कराया। बताया जाता है कि पत्र में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में जाने पर नुकसान का भी जिक्र किया। इसके बाद बुधवार को पार्टी फिर जेडीयू के खिलाफ अपने पुराने तेवर में लौटती दिखी।

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