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    नीतीश कुमार: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से सोशल इंजीनियरिंग तक, जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर; अब 10वीं बार सीएम बनने को तैयार

    Updated: Sun, 16 Nov 2025 05:30 AM (IST)

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में प्रचंड जीत हासिल की। महागठबंधन को करारी हार मिली। नीतीश कुमार, जिन्होंने इलेक्ट्रिकल ...और पढ़ें

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    नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने सबको चौंका कर रख दिया है। चाहे विपक्ष हो राजनीतिक विश्लेषक NDA के प्रचंड जीत से हर कोई अचंभित है।

    सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई में NDA ने 202 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी महागठबंधन को महज 35 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। ऐसे में एक बार फिर बिहार में नीतीश के चेहरे में कमल कर दिया।

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    नीतीश ने भले ही इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई की है, लेकिन उन्होंने चुनावी गणित और सामाजिक समीकरणों को जोड़ने में महारत हासिल की हुई है।

    सुशासन बाबू से मशहूर नीतिश कुमार बिहार की जातीय ढ़ांचा और राजनीतिक गठबंधनों के खेल में हर बार खुद को नए सिरे से स्थापित करते रहे हैं। ऐसे में आइए उनके राजनीतिक सफर के बारे में जानते हैं।

    1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर (पटना) में जन्मे नीतीश कुमार ने 1972 में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (NIT पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। पर उनकी रुचि मशीनों से ज्यादा समाज और राजनीति की धड़कनें पढ़ने में थी। उनका ज्यादा रुझान सोशल इंजीनियरिंग की ओर था।

    जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    1974-77 के दौरान वे जेपी आंदोलन में कूद पड़े और आपातकाल में जेल भी गए। 1985 में हरनौत से पहली बार विधायक बने। फिर 1989 में बाढ़ से लोकसभा पहुंचे और करीब 15 वर्षों तक संसद में सक्रिय रहे।

    1998 में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई और पहली बार रेल मंत्री बने। उसी दौरान पश्चिम बंगाल के गैसल ट्रेन हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उनका इस्तीफा आज भी राजनीति में मिसाल माना जाता है। नीतीश का राजनीतिक सफर यू-टर्न्स से भरा रहा, जिसमें हर मोड़ पर एक नई सामाजिक और राजनीतिक रणनीति नजर आई।

    2000 में पहली बार मुख्यमंत्री

    • 2000: पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न मिलते ही 7 दिन बाद इस्तीफा दे दिया।
    • 2005: आरजेडी शासन को चुनौती देते हुए प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटे, यहीं से 'गुड गवर्नेंस' का उनका ब्रांड मजबूत हुआ।
    • 2014: एनडीए से नाता तोड़ा और हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सीएम पद छोड़ दिया।
    • 2015: लालू प्रसाद यादव के साथ हाथ मिलाया, महागठबंधन बनाया और तेजस्वी को डिप्टी सीएम बनाकर सरकार बनाई।
    • 2017: महागठबंधन छोड़ फिर एनडीए में शामिल हुए।
    • 2022: एनडीए छोड़ा, फिर महागठबंधन में वापसी।
    • 2024: दोबारा एनडीए की ओर रुख किया।
    • 2025: इसी एनडीए की ऐतिहासिक जीत ने उन्हें 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता दे दिया।

    फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार एक बार फिर से शपथ लेंगे या फिर किसी और चेहरे को बिहार की मुख्यमंत्री चुना जाएगा।