बिहार दारोगा भर्ती में EOU की जांच से खुलासा, परीक्षा शुरू होने के बाद बाहर पहुंचे प्रश्नपत्र
बिहार दारोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है, जहाँ परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्न-पत्र केंद्र ...और पढ़ें
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आर्थिक अपराध इकाई ने दर्ज की एफआईआर। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
दारोगा प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्नपत्र बाहर भेजे गए।
EOU जांच में केंद्राधीक्षक, कर्मी की भूमिका संदिग्ध।
परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर लीक का खुलासा।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के द्वारा आयोजित दारोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है।
प्रारंभिक परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्न-पत्र परीक्षा केंद्र के बाहर भेजकर साल्वर गैंग से हल कराए गए। इतना ही नहीं, जिन अभ्यर्थियों रूपेश कुमार और नरेश कुमार के प्रश्न-पत्र बाहर भेजे गए वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल भी हुए हैं।
इनमें रूपेश कुमार मुख्य परीक्षा में भी उत्तीर्ण हुआ है। दोनों अभ्यर्थियों के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए आयोग को अनुशंसा भेजी जा रही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की SIT जांच में यह बातें सामने आई हैं।
ईओयू ने दर्ज की एफआईआर
इस मामले में ईओयू में मंगलवार को भारतीय न्याय संहिता, 2023 और बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अनुसंधान जारी है।
जांच के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को प्रथम पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 51212241 और द्वितीय पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 52212038 को परीक्षा केंद्र से अनधिकृत रूप से बाहर भेजा गया।
यह केंद्र 2 आरपीसी हाई स्कूल, पूर्णिया सिटी था। आरोप है कि परीक्षा संचालन से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत से प्रश्नपुस्तिकाएं बाहर भेजी गईं और उनके उत्तर तैयार कराकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।
केंद्राधीक्षक और कार्यालय कर्मी की भूमिका संदिग्ध
ईओयू की जांच में इस अनियमितता में केंद्राधीक्षक मो. मुज्जफर आलम और उनके सहयोगी कार्यालय कर्मी विवेक कुमार की भूमिका सामने आई है।
जांच में पता चला है कि परीक्षा में सेटिंग करने के लिए वास्तविक सीटिंग प्लान से छेड़छाड़ की गई थी। जांच में अलग सीटिंग प्लान तैयार करने, साक्ष्य छिपाने और आयोग को गलत प्रतिवेदन देने के साक्ष्य मिले हैं।
इसके अलावा परीक्षा हाल में निर्धारित मानकों से अलग तरीके से अभ्यर्थियों को बैठाने, वीक्षकों की मनमाने ढंग से प्रतिनियुक्ति करने और ड्यूटी चार्ट पर गलत तरीके से हस्ताक्षर कराने के आरोप भी सामने आए हैं।
एसआईटी ने आयोग के जवाब और अभिलेखों, सीसीटीवी फुटेज, केंद्राधीक्षक एवं वीक्षकों से पूछताछ, उनके लिखित बयानों तथा सीटिंग प्लान और ड्यूटी चार्ट की जांच के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले हैं।
परीक्षा शुरू होने से पहले पेपर लीक नहीं
ईओयू के अनुसार, जांच में अब तक ऐसा साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा शृंखला (चेन आफ कस्टडी) परीक्षा शुरू होने से पहले टूटने की पुष्टि हो।
जांच टीम के अनुसार, दोनों प्रश्नपुस्तिकाएं परीक्षा शुरू होने के बाद केंद्र से बाहर निकाली गईं। मालूम हो कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए दो सितंबर 2026 को एसआईटी गठित की गई थी।
मुख्य परीक्षा से संबंधित जांच रिपोर्ट पहले ही आयोग को सौंपी जा चुकी है, जिसके बाद मुख्य परीक्षा को रद कर दिया गया था।
