पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में लाल बालू के काले खेल ने सरकार की खूब बदनामी कराई है वहीं रुपए कमाने की हवस में बड़े-बड़े अधिकारियों का करियर बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गया है। दर्जनों अधिकारियों को निलंबित किए जाने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज हो रही हैं और निगरानी ब्‍यूरो की कार्रवाई लगातार ही जारी है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के रडार पर अब भी राज्य के तीन दर्जन अफसर हैं। बालू के अवैध खनन मामले में ईओयू की जांच रिपोर्ट के आधार पर 41 पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारी निलंबित किए गए थे। इन सभी की संपत्ति की जांच ईओयू की टीम कर रही है। जैसे-जैसे जांच में अफसरों के खिलाफ अवैध कमाई के सबूत मिलेंगे, वैसे-वैसे प्राथमिकी दर्ज कर छापेमारी की कार्रवाई की जाएगी।

अभी तक इस मामले में पांच अफसरों पर आय से अधिक संपत्ति की प्राथमिकी दर्ज करते हुए उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इसमें भोजपुर के निलंबित एसपी राकेश दुबे, एसडीपीओ पंकज कुमार रावत, पालीगंज के एसडीपीओ तनवीर अहमद, डेहरी के एसडीओ सुनील कुमार सिंह और एमवीआइ विनोद कुमार शामिल हैं।

अफसरों पर विभागीय कार्यवाही भी जारी

निलंबित किए गए पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही भी जारी है। अफसरों से उनपर लगे आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद उन पर विभाग के स्तर से भी कार्रवाई होनी है। ईओयू सूत्रों के अनुसार, जल्द ही बालू खनन में कई अन्य अफसरों के ठिकानों पर भी छापेमारी हो सकती है।

इन अफसरों पर हुई कार्रवाई

13 अगस्त : डेहरी के निलंबित एसडीओ सुनील कुमार सिंह के गाजीपुर, पालीगंज व पटना के ठिकानों पर छापेमारी।

02 सितंबर : पालीगंज के निलंबित एसडीपीओ तनवीर अहमद के पटना व बेतिया स्थित पैतृक आवास पर छापा।

04 सितंबर : आरा के निलंबित एसडीपीओ पंकज कुमार रावत के पटना, दानापुर व नालंदा के ठिकानों पर छापेमारी।

08 सितंबर : आरा के निलंबित एमवीआइ विनोद कुमार के पटना, आरा व बक्सर के पैतृक आवास पर छापा।

16 सितंबर : आरा के निलंबित एसपी राकेश दुबे के पटना व जसीडीह स्थित चार ठिकानों पर छापेमारी।