पटना, जागरण संवाददाता। Bihar CoronaVirus News: कोरोना वायरस महामारी के संकट काल में डॉक्‍टर, नर्स, दूसरे मेडिकल स्‍टाफ और जिम्‍मेदार प्रशा‍सनिक अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं, ताकि आम लोगों को बचाया जा सका। दूसरी तरफ, इन्‍हीं के बीच चंद लोग ऐसे भी हैं, जिनकी कारस्‍तानी से पूरा विभाग और पूरी बिरादरी बदनाम होती है। ऐसे ही तीन अधिकारियों पर मंगलवार को प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। इन तीनों की ड्यूटी पटना एम्‍स में लगाई गई थी, लेकिन जांच में पाया गया कि वे अपने कार्यस्‍थल बगैर सूचना के गायब हैं।

फुलवारीशरीफ थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में प्रतिनियुक्त तीन दंडाधिकारी निरीक्षण में अनुपस्थित मिले थे। जिला प्रशासन ने तीनों पर फुलवारीशरीफ थाने में कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, बगैर सूचना के अनुपस्थित रहने तथा आदेश की अवहेलना के आरोप में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की विभिन्न धाराओं एवं आइपीसी-188 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है।

एक कृषि समन्‍वयक और दो पीआरएस पर कार्रवाई

विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने प्राथमिकी के लिए दिए आवेदन में कहा कि कोविड रोगियों के समुचित चिकित्सा लाभ उपलब्ध कराने एवं विधि व्यवस्था के लिए एम्स, पटना में नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई। इसमें सदावह डोरवा, दुल्हिन बाजार के कृषि समन्वयक संजीत कुमार, पीआरएस फुलवारीशरीफ दिलीप ठाकुर और शशि कुमार को प्रतिनियुक्त किए गए थे।

30 अप्रैल को निरीक्षण के वक्‍त मिले थे गायब

30 अप्रैल को तीनों दंडाधिकारी निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए। इनकी अनुपस्थिति के कारण कोरोना संक्रमित रोगियों को दाखिला कराने में विलंब हुआ। जिससे विधि व्यवस्था भी प्रभावित हुई। जिला प्रशासन कोविड से जुड़े मामलों को पूरी गंभीरता से ले रहा है। पटना हाईकोर्ट की ओर से तल्‍ख‍ टिप्‍पणी और राज्‍य में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए प्रशासन अब जरा भी ढील देने के मूड में नहीं है।

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