राज्य ब्यूरो, पटना: Bihar CoronaVirus News: बिहार में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। चिंता कई प्रकार की है। गांवों में गेहूं की कटनी के बाद डंठल जलाने को लेकर जागरूक करने और सख्ती बरतने वाली टास्क फोर्स की सुस्ती से बेतहाशा प्रदूषण बढ़ रहा है। टास्क फोर्स टीम जहां कोरोना के डर से दुबकी हुई है, वहीं किसान खेतों में धड़ल्ले से डंठल जला रहे हैं। किसानों के सामने मजदूरों की किल्लत और मानसून के करीब आने का खौफ है। बारिश शुरू हो जाएगी तो किसानों को धान की बुआई में जुट जाना है। ऐसे में किसान मशीन से गेहूं की कटाई करने के बाद डंठल जला दे रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने फसल अवशेष को खेत में जलाने वाले किसानों को कई सुविधाओं से वंचित करने का सख्त प्रविधान कर रखा है।

जागरूकता के अभाव हो रहा ऐसा

यही नहीं, फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर तमाम सुविधाएं किसानों को सरकार दे रही है। कृषि यंत्रों के अनुदान की सुविधा किसान प्राप्त कर रहे हैं। फिर भी जागरूकता के अभाव और विभिन्न कारणों से किसान फसल अवशेष खेत में जला रहे हैं।

पुआल जलाने के कुल 1124 नए मामले

प्रदेश में इस साल खरीफ मौसम में पुआल जलाने के कुल 1124 नए मामले आए हैं। ऐसे किसानों के खिलाफ कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। दो हजार 138 किसानों के पंजीकरण को अगले तीन सालों के लिए निरस्त कर दिया गया है और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं से उन्हें वंचित भी कर दिया गया है। 

कुल 376 घटनाएं पकड़ में आईं थीं

बता दें कि पिछले खरीफ मौसम (2019) में पूरे प्रदेश में फसल अवशेष जलाने की 376 घटनाएं हुई थीं, जो इस बार बढ़कर 1124 हो गई। कृषि विभाग के अनुसार 2019 में औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, गया, कैमूर, मधुबनी, नालंदा, पटना और रोहतास में कुल 376 घटनाएं पकड़ में आईं थीं। बक्सर में सबसे अधिक 101 और कैमूर में 80 मामले सामने आए थे। इस बार भोजपुर में 32, कैमूर में 318 और रोहतास में 133 घटनाएं सामने आई हैैं। दिसंबर से फरवरी तक धान की कटनी के बाद जो आंकड़े एकत्रित किए गए थे उनमें सबसे अधिक 528 मामले रोहतास में सामने आए थे। कैमूर में 152, बक्सर में 160, नालंदा में 106 किसानों को चिह्नित किया गया था।

 

जागरूकता अभियान ठप


वर्तमान में कोरोना के कारण जिलों में किसानों के बीच फसल अवशेष जलाने संबंधित जागरूक अभियान ठप है। किसानों के बीच डर यह है कि बाहर से आए ज्यादातर मजदूर संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में किसान मजदूरों से काम लेने से कतरा रहे हैं।