बिहार में संबद्ध कालेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति का पैटर्न बदला, अब CAS के तहत प्रमोशन; 1992 वाला नियम समाप्त
बिहार में संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति के पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब 1992 के ...और पढ़ें

लोकभवन सचिवालय ने बदला पैटर्न। फाइल
HighLights
1992 के प्रोन्नति नियम को समाप्त किया गया।
अब शिक्षकों को करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) से प्रोन्नति।
यह बदलाव 23 सितंबर 1995 से प्रभावी माना जाएगा।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने प्रदेश के घाटानुदानित कालेजों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
राज्यपाल के निर्देश पर विश्वविद्यालयों से संबद्ध काॅलेजों के प्राध्यापकों को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने से संबंधित वर्ष 1992 के नियम को समाप्त कर दिया गया है।
यह अहम निर्णय 23 सितंबर 1995 से प्रभावी माना जाएगा। इसमें धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक काॅलेज भी शामिल हैं। मंगलवार को राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से अधिसूचना जारी की गई।
करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत होगी प्रोन्नति
अधिसूचना के मुताबिक राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन द्वारा चार कुलपतियों की समिति की अनुशंसा और उच्च शिक्षा विभाग से मिले प्रस्ताव पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
घाटानुदानित काॅलेजों के शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों, जैसे-सहायक प्राध्यापक और सह-प्राध्यापक की प्रोन्नति के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत निर्धारित नियम लागू होंगे।
प्रोन्नति की व्यवस्था विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत काॅलेजों के लिए लागू प्रावधानों के अनुरूप होगी। इसके लिए समान प्रभावी तिथि और समय-समय पर लागू सीएएस के प्रावधानों का पालन किया जाएगा।
1992 की अधिसूचना का प्रावधान खत्म
अधिसूचना के मुताबिक 14 सितंबर 1992 के पत्र के माध्यम से अधिसूचित उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत संबद्ध काॅलेजों के व्याख्याताओं को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने का प्रावधान था।
यह व्यवस्था 23 सितंबर 1995 से प्रभावहीन मानी जाएगी। यह बदलाव राज्य के विश्वविद्यालयों से संबद्ध घाटानुदानित कालेजों के साथ धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक काॅलेजों पर भी लागू होगा।
सीएएस के तहत प्रोन्नति से संबंधित पूर्व में जारी नियमों में इसी के अनुरूप संशोधन माना जाएगा। इस निर्णय से संबंधित काॅलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए लागू व्यवस्था में बदलाव होगा।
