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RJD सांसद सुधाकर सिंह बनाम DG कुंदन कृष्णन विवाद पहुंचा CM तक, सम्राट चौधरी ने दिया जांच का आदेश

Published: Tue, 27 Oct 2026 09:48 PM (IST)

राजद सांसद सुधाकर सिंह और डीजी कुंदन कृष्णन के बीच चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संज्ञान लिया ...और पढ़ें

सीएम सम्राट चौधरी ने सुधाकर स‍िंंह के पत्र पर ल‍िया संज्ञान। फाइल

सीएम सम्राट चौधरी ने सुधाकर स‍िंंह के पत्र पर ल‍िया संज्ञान। फाइल

HighLights

  1. RJD सांसद सुधाकर सिंह और DG कुंदन कृष्णन का विवाद गहराया।

  2. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विवाद का गंभीरता से संज्ञान लिया।

  3. गृह विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

राज्य ब्यूरो, पटना। RJD सांसद सुधाकर सिंह और एसटीएफ के महानिदेशक (DG) कुंदन कृष्णन के बीच चल रहे विवाद को मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंभीरता से लिया है। 

मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) ने संज्ञान लेते हुए छानबीन कर आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस मामले में सांसद सुधाकर सिंह ने 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिखा था।

इस पत्र में भारत भूषण तिवारी की हत्या की निष्पक्ष जांच, तत्कालीन पुलिस कमान की जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनहित के मुद्दे उठाने के कारण भेजे गए मानहानि के नोटिस से संबंधित विषय पर कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से उप सचिव मो. इमरान ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर इन तीनों विषयों की छानबीन कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए समुचित निर्णय लेने को कहा है।

कार्रवाई से सांसद को भी कराएं अवगत 

इस कार्रवाई की जानकारी सांसद सुधाकर सिंह और मुख्यमंत्री सचिवालय को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
मालूम हो कि सांसद सुधाकर सिंह भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार पुलिस की कार्यशैली और डीजी कुंदन कृष्णन पर हमलावर हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि जनहित का मुद्दा उठाए जाने पर डीजी कुंदन कृष्णन ने उन्हें 5 करोड़ की मानहानि का नोटिस भेजा है।

आईपीएस अधिकारी को लेकर सीएम को ल‍िखा था पत्र 

बता दें कि सुधाकर सिंह ने एसटीएफ के डीजी कुंदन कृष्‍णन के पांच करोड़ के मानहानि नोट‍िस के बाद मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखा था।  

नोट‍िस भेजे जाने को उन्‍होंने लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा एक गंभीर सवाल बताया था। 

उन्‍होंने प्रेस कांफ्रेंस कर भी अपनी बात स्‍पष्‍ट की थी। कहा था कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। अधिकारी जनता के नौकरशाह हैं और जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह हैं।  

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