पटना, आनलाइन डेस्‍क। Bihar Political Crisis: बिहार में बिना मुख्‍यमंत्री बदले सरकार बदल गई है। नीतीश कुमार की सरकार में शामिल सभी मंत्री अपनी कुर्सी से बेदखल हो गए हैं। नई सरकार में जदयूू के ज्‍यादातर मंत्रियों की वापसी हो जाने की उम्‍मीद है। हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा के एक मात्र मंत्री की भी वापसी हो सकती है, लेकिन भाजपा कोटे के सभी मंत्री बाहर हो गए हैं। इनकी जगह लेंगे राजद और कांग्रेस के नेता। लेकिन, नीतीश कुमार के नए गठबंधन में शामिल होने के बाद भी भाजपा के और जदयू के एक नेता के पास पुराना पद शेष रह गया है। ये तीन नेता कौन हैं और इनका क्‍या भविष्‍य होने वाला है, इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं। 

राज्‍यसभा के उप सभापति हैं जदयू के हरिवंश 

जदयू की ओर से हरिवंश राज्‍यसभा के सदस्‍य हैं। वे फिलहाल राज्‍यसभा के उप सभापति हैं। इंटरनेट मीडिया पर इस बात की तेज चर्चा है कि क्‍या इस पद पर कोई बदलाव होगा? हरिवंश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी बेहतर संबंध हैं। सदन के संचालन में उनकी विद्वता और कुशलता झलकती है। इस बात की चर्चा अध‍िक है कि वे इस पद पर फिलहाल बने रह सकते हैं। 

विधान परिषद के सभापति हैं अवधेश नारायण 

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह पर सबसे अधिक लोगों की निगाहें हैं। ऐसा इसलिए कि अवधेश नारायण सिंह के नीतीश कुमार से बेहतर रिश्‍ते हैं। इतने बेहतर कि पिछली दफा भाजपा को छोड़कर नीतीश कुमार जब राजद और कांग्रेस के साथ गए थे, तब भी उन्‍होंने अवधेश नारायण को उनके पद पर ही बने रहने दिया था। क्‍या इस बार भी ऐसा ही होगा? या सभापति का चेहरा बदलेगा, यह वक्‍त बताएगा। 

विधानसभा अध्‍यक्ष का बदला जाना तय

बिहार विधानसभा के अध्‍यक्ष विजय कुमार सिन्‍हा भाजपा के व‍िधायक हैं। उनका बदला जाना तय है। महागठबंधन की सरकार बनते ही विधानसभा में पहला काम यही होने की उम्‍मीद है। विजय कुमार सिन्‍हा अगर खुद अपना पद नहीं छोड़ते हैं, तो उनके ख‍िलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव भी लाया जा सकता है। 

Edited By: Shubh Narayan Pathak