पटना [काजल]। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने फेसबुक एकाउंट पर एक पोस्ट लिखा है जिसमें उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वे अपने शराबबंदी के फैसले से पीछे हटने वाले नहीं हैं। नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा है कि मेरा सार्वजनिक रिकॉर्ड पारदर्शी रहा है।

नीतीश ने कहा कि जब मैं किसी को वचन देता हूं तो उसे हर हाल में निभाने की कोशिश करता हूं। मैंने पिछले साल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में घोषणा करते हुए कहा था कि यदि हम दोबारा सत्ता संभालेंगे तो शराब पर पाबंदी लगाएंगे और अब शराबबंदी लागू करने के बाद अब इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पर जिन राज्यों में पाबंदी है, वहां यह सिर्फ प्रतीकात्मक है।लेकिन, बिहार में ऐसा नहीं है और न ऐसा होने दिया जायेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश और झारखंड में शराबबंदी की अपनी मुहिम की चर्चा करते हुए कहा कि मैंने उत्तर प्रदेश और झारखंड की सरकारों से शराबबंदी लागू करने की अपील की, लेकिन वो लोग अबतक साहस नहीं जुटा सके हैं।

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कहा कि शराबबंदी का एलान और इसे लागू करना काफी कठिन कार्य था, लेकिन अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता। शराबबंदी को लेकर मुश्किल बात यह थी कि इससे पहले कभी भी सफलतापूर्वक इसे लागू नहीं किया जा सका था। लेकिन, मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया और इसे अंजाम तक पहुंचाया है।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

नीतीश कुमार के इस पोस्ट पर कल से ही कोहराम मचा हुआ है। जहां फेसबुक पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी वहीं उनके सहयोगी गठबंधन दल राजद के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने तो सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सीएम नीतीश नया शराबबंदी कानून वापस लें।

रघुवंश प्रसाद सिंह के ऐसा कहने के साथ ही प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने भी तंज कसा है कि शराबबंदी को लेकर महागठबंधन में खुद ही एका नहीं है, राजद ने शराबबंदी की जमकर बाट लगा रही है। रघुवंश प्रसाद ने ही कहा कि शराबबंदी कानून वापस लें, अब कोई और क्या कहेगा?

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वहीं इन सब बातों का बचाव करते हुए जदयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार महात्मा गांधी का अनुसरण कर रहे हैं। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि मुझे भी मौका मिले तो सबसे पहले मैं शराबबंदी करा दूं।

नीतीश कुमार के इस पोस्ट पर फेसबुक पर भी लोगों ने जमकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे सराहा है तो कुछ ने इसे तानाशाही करार दिया है।

लोगों ने दीं तीखी प्रतिक्रियाएं-

नवीन कुमार ने लिखा है कि- जैसी कि आपने इच्छा व्यक्त की है आपने लेख में तानाशाह बनने की, ऊपरवाला और आप जानते कि आप वही बन गए है। किसी और के जुर्म की सजा किसी और को देना सिर्फ एक तानाशाह या मुर्ख सोच सकता है। अच्छी बात है शराब बंद करना, पर बाकि सब कुछ दाँव पर लगा के? शायद किसी बुद्धिमान ने कहा है "अति सर्वत्र वर्जयेत " ! पर अब तो आप ..... खैर छोडिय़े और बिहार मे कुछ विकास का काम कीजिये ताकि लोग काम के खोज में वहां से पलायन न करें जैसे की हम और हमारे जैसे करोड़ो लोग !कुछ काम कीजिये ताकि हम देश मे सबसे पिछड़े न रहे।

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अजीत कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि औरंगजेब ने भी शराब बंद करवा दिया था। एक दिन उनके गुप्तचरों ने सूचना दी कि पचास लोग इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया गया और एक कमरे में बंद कर दिया। दूसरे दिन तलवार से उनलोगों का सर कलम कर दिया। आपकी यह शराबबंदी उसी औरंगजेब की याद दिलाती है।

नागेश त्रिपाठी ने पूछा है कि क्यों नितीश बाबू,शराबबंदी लागू करके पेट्रोल पर वैट क्यों बढाने लगे? हार मान लिए? शराबबंदी अमीर और धनी राज्यों के लिए है। आपका राज्य दरिद्र सुदामा है।पहले यहाँ से गरीबी दूर कीजिये।तब शराबबंदी लागू करिये।पहले घर की आमदनी देखी जाती है, उसके अनुसार खर्च किया जाता है।पडोसी अपने घर में एसी लगा रहा है, तब देखा देखी में हम भी कर्जा लेकर घी पीने लगेंगे?

आलोक रंजन ने कहा है कि - नितिश जी ने बिहार मे शराब बंदी कर निश्चित तौर पर बहुत बेहतर काम किया है इससे गरिबी रेखा से नीचे वाले लोगों का जीवन स्तर उंचा होगा , एक ओर जहां लोगों को इससे फ़ायदा हो रहा है तो दूसरी ओर आम लोगो को महंगाई की मार झेलनी पर रही है। शराब बंदी के कारण जो आर्थिक नुकसान राज्य को हुआ , वो अन्य करों की वृद्धि कर आम लोगों से वसूला जा रहा जिसका सीधा असर आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। नितिश राजनीतिक फ़ायदे से उपर उढकर आम लोगो के बारे मे सोचना चाहिये ,जो अतिरिक्त भार वो आम लोगो को दे रहे उसे बंद करे।

विशाल सिंह ने लिखा है कि भ्रष्टाचार करिए और बेल पाइये मगर घर में कोई शराब के साथ पकडाए तो पूरा परिवार जेल जाए, शानदार। मर्डर कीजिये फिर भी पूरा परिवार दोषी नहीं। बेल भी मिल जायेगी मगर यहाँ पूरा गांव और परिवार ही दोषी हो जा रहा वो भी बिना बेल के ।

कभी विचार नहीं आया की कोई पॉलिटिशियन घोटाला या जुर्म करे तो पूरा परिवार दोषी हो और सबकी सम्पति जब्त हो और सारा परिवार जेल जाए।

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मानव त्रिपाठी ने लिखा है कि नीतीश जी! अगर किसी ग्राम मे एक व्यक्ति के मदिरा रखने पर सम्पूर्ण ग्रामवासी जुर्माने के दायरे मे आते है,उस ग्राम तक मदिरा पहुंचाने वाली व्यवस्था भी तो जुर्माने के दायरे मे आनी चाहिए न? तथा उस व्यवस्था को संभालने वाले जन प्रतिनिधि भी ... उम्मीद है आप जवाब जरूर देगे,क्योकि जितना हम जानते है आपको, उससे हमे इतना तो स्पष्ट है कि आप स्पष्ट बोलने मे पूर्ण विश्वास रखते है!

कुछ ने दी नसीहत

मनीष कुमार ने लिखा है कि मुख्यमंत्री जी ये बहुत ही अच्छा कदम है एक अच्छी शुरुआत. आपने वाकई में बहुत सराहनीय कार्य किया और जनता से किया वादा निभाया। लेकिन पुलिस को इतनी ताकत मत दीजिए। पुलिस पहले से ही बहुत भ्रष्ट है। मैंने पुलिस को भेदभाव करते पक्षपात करते खुद झेला है, कमजोर और गरीब लोगों को पुलिस परेशान करती है। रिश्वत के तौर पर पैसे लेने में पुलिस को जरा सा शर्म नहीं आती है। पुलिस के आतंक को कृपया कर के रोक लीजिये महोदय जी, जनता आप पर भरोसा करती है लेकिन भ्रष्ट पुलिस पर नहीं।

मनोज कुमार ने लिखा है कि बिहार में शराब क्या पूर्ण नशा बंदी किजिये, लेकिन आपका तरीका गलत है। आप डंडे के जोर से किसी का मन नहीं मोड़ सकते और जहाँ तक आपके इस कानून का सवाल है कि घर में शराब की बोतल मिलने पर 18 साल से ऊपर के सभी सदस्य जेल जायेंगे, ये किसी तानाशाह के ही विचार हो सकते हैं।

वैसे आपके सात निश्चय अगर डंडे के जोर पर ही लागू हों तो मुझे लगता है बिहार में 15अगस्त 1947 कभी आया ही नहीं। जरा ठहर कर सोच लीजिये सरकार, बिहार को कैसे और कहाँ ले जाना है?

इसके अलावे भी काफी लोगों ने कुछ तीखी और कुछ अच्छी प्रतिक्रियाएं दीं हैं। किसी ने नसीहत दी है तो किसी ने आलोचना की है। कुछ लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है तो कुछ ने इस कदम को सराहा है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार का फैसला सही है और देश में वही एक ऐसे नेता हैं जो ऐसा बड़ा फैसला ले सकते हैं।

Posted By: Kajal Kumari

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