पटना, काजल। बिहार पुलिस शर्मिंदगी और नाकामी का दंश झेल रही है। पुलिस विभाग को कभी पटना हाईकोर्ट तो कभी स्वयं बिहार के मुख्यमंत्री बार-बार सुधर जाने की बात कहकर चेताते रहते हैं? लेकिन आखिर क्या वजह है कि पुलिस की कार्यशैली की वजह से जनता के बीच तो उसकी साख गिरती ही जा रही है, राज्य में अपराधी बेखौफ होकर कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

बालू माफिया और शराब तस्कर से परेशान है पुलिस 

एक ओर बालू माफिया तो दूसरी ओर शराब के कारोबारी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। अपराधियों के बीच पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है। प्रतिदिन राज्य में शराब की बरामदगी हो रही है। कुछ तस्कर पकड़े जाते हैं तो कुछ फरार हो जाते हैं। राज्य के डीजीपी कुछ भी कहें? कोई भी कार्रवाई करें लेकिन अपराधी नित नए अपराध की घटना को अंजाम दे रहे हैं। चाहे वह हत्या का मामला हो, लूट का मामला हो, दुष्कर्म की घटनाएं हों, पुलिस पर सवालिया निशान लगते रहे हैं। 

हाईकोर्ट ने लगायी थी फटकार, नीतीश कुमार की मिली डांट

जहां मंगलवार को पटना हाईकोर्ट ने पुलिस को जमकर फटकार लगायी थी और कहा था कि आप एक चोर को तो पकड़ नहीं सकते, आम आदमी को परेशान करना आपका काम रह गया है तो वहीं गुरुवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पुलिस विभाग की कार्यशैली पर जमकर डांट लगाई।

उन्होंने साफ-साफ शब्दों में पुलिस कर्मियों से कहा कि 'जब हम आपके लिए सब काम कर रहे हैं तब कुछ तो करोगे भाई।' नीतीश कुमार  बिहार विधानसभा में गृह विभाग के बजट पर बोल रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि अब पुलिस विभाग में गड़बड़ करने वालों के साथ नरमी कतई नहीं बरती जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने कहा था-आप तो एक चोर तक नहीं पकड़ सकते

पुलिस की कार्यशैली से नाराज पटना हाईकोर्ट ने तो मंगलवार को तल्ख टिप्पणी की। कहा, पुलिस का काम केवल भले लोगों को परेशान करना रह गया है। उसे नियम कानून से कुछ लेना-देना नहीं। अधिकारियों ने कानून की किताबें पढऩा बंद कर दिया है। 

कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को पढऩे-लिखने और कानून से कुछ लेना-देना नहीं है, जो मन में आया वही कर गुजरते हैं। ये चोर- डकैत को पकड़ ही नहीं पाते हैं जबकि जो सही काम करते हैं उसे भी उलझा देते हैं। इनका काम बस भले लोगों को परेशान करना रह गया है । 

पूर्व डीजीपी ने कहा-कानून व्यवस्था सुधारने के लिए तकनीक हो सही

इस पर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने कहा कि कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस इसके लिए तकनीक और क्रियेटिविटी की जरूरत है। अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस को खास योजना बनाकर उसे लागू करने के लिए माइंड गेम का इस्तेमाल करना होगा।

जिस तरह किसी गेम को जीतने के लिए प्लानिंग करने के बाद सामने वाले का मनोविज्ञान समझना पड़ता है उसी तरह अपराधी को पकड़ने के लिए लाठी-डंडे का इस्तेमाल करने की बजाय, अपराध को रोकने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग नहीं अपराधियों के बीच खौफ होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि अपराध रोकने के लिए पुलिस को किसी नए तरीके का इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं है, बस प्रैक्टिकल होकर प्रोफेशनल तरीके का प्रयोग करना होगा। 

सीएम ने स्वीकार किया -बिहार में बढ़ गया है अपराध

 अगर देखें, तो गुरुवार को नीतीश कुमार के भाषण की भी खास बात यह रही कि उन्होंने स्वीकारा कि बिहार में अपराध, जैसे चोरी, हत्या या अपहरण जैसी वारदातों में वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री नीतीश ने स्वयं उन आंकड़ों को झुठलाने की कोशिश नहीं की, बल्कि सदन में उनके विभाग द्वारा किए गए विश्लेषण को सामने रखा और पुलिसिया कार्यशैली पर नाराजगी जतायी। नीतीश ने कहा कि अपराध उन्मूलन का दावा तो वे नहीं कर सकते, लेकिन नियंत्रित करने के लिए हर उपाय जरूर कर रहे हैं।

 सीएम ने फिर से दी पुलिस को चेतावनी

अपने भाषण में सीएम ने कहा कि गलत काम करने वाले पुलिस वालों को चेतावनी ज़रूर दी कि अब जिनके इलाके में शराब की खरीद-बिक्री होगी, उनकी थाने में दस सालों तक पोस्टिंग नहीं होगी। जिनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई चलेगी, उनकी भी थाने में पोस्टिंग नहीं होगी। 

बड़ा सवाल-बदल जाएगी बिहार पुलिस....

बता दें कि बिहार में अपराधी आजकल बेखौफ हो गए हैं और प्रतिदिन हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और दुष्कर्म की बड़ी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। खासकर शराबबंदी कानून के बावजूद प्रतिदिन शराब की बिक्री और तस्करी जारी है और पुलिस इन मामलों पर कार्रवाई करने में नाकामयाब साबित हो रही है। मुख्यमंत्री औऱ पटना हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस की कार्यशैली में बदलाव आएगा क्या?

Posted By: Kajal Kumari

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