पटना, सुनील राज। Bihar Chunav 2020: सचिन पायलट (Sachin Pilot) को राजनीति विरासत में मिली है। पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता थे। पिता से मिली राजनीतिक शिक्षा को इन्होंने जीवन में आत्मसात किया। अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद वे भारतीय राजनीति से जुड़े। केंद्र सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से लेकर राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर रहे। सचिन पायलट की गिनती देश के उन नेताओं में होती है, जो व्यवस्था में बदलाव की बात करते हैं। वे कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए बिहार में थे। पटना में चुनावी सभा के दौरान उन्होंने दैनिक जागरण से विस्तार से बातचीत की।

प्रश्‍न: चुनाव प्रचार को लेकर आप बिहार की राजनीति को करीब से देख रहे हैं? क्या महसूस हुआ?

उत्‍तर: देखिए, बिहार में बदलाव की जो हवा थी वो अब आंधी में तब्दील हो गई है। यहां की जनता ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का 15 वर्षों का शासन देखा। उन्होंने इन सालों में बहुत सी बातें कहीं। बहुत दावे किए लेकिन वे जनता की आकांक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। हमारे गठबंधन ने जो वादे किए हैं उसका असर दिख रहा है। मैंने महसूस किया है कि बिहार में भारी बहुमत के साथ हमारी सरकार बनने जा रही है।

प्रश्‍न: आप जिस सहजता से दावा कर रहे हैं, क्या उतनी आसानी से यहां सरकार बन जाएगी?

उत्‍तर: वोट की राजनीति में मालिक जनता होती है। मैंने अपनी इस यात्रा में महसूस किया है कि बिहार की जनता भाजपा-जदयू की सरकार से आजिज आ चुकी है और वह बदलाव चाहती है। जनता कभी कुछ बोलती नहीं। सिर्फ देखती है और बटन दबाती है। जनता ने एनडीए को सत्ता से बाहर करने का प्लॉट तैयार कर दिया है। मैं देख रहा हूं कि जनता इस बार ऐसा बटन दबाएगी कि भाजपा-जदयू की सरकार सीधे बाहर नजर आएगी।

प्रश्‍न: इन सबके बीच आप लोक जनशक्ति पार्टी को भूल रहे हैं? शायद उस पक्ष पर आपकी नजर नहीं?

उत्‍तर: पांच अंगुलियां मिलकर मुट्ठी बनती है। बिहार के महागठबंधन (Mahagathbandhan) में पांच दल हैं। राजद-कांग्रेस और तीन वामदल। आप अंदाजा लगा लीजिए कि बिहार में हमारी मुट्ठी कितनी ताकतवर होगी। बिहार में जनता न तो चिराग पासवान (Chirag Paswan) को वोट करने जा रही है और न ही एनडीए को। उसकी निगाहें इस बार महागठबंधन पर है।

प्रश्‍न: मगर भाजपा भी यह चुनाव काफी आक्रामक होकर लड़ रही है?

उत्‍तर: जिस गठबंधन में अंदर ही अंदर कलह हो। छोटा भाई, बड़ा भाई बनने की जद्दोजहद कर रहा हो वहां आक्रामक चुनाव की बात बेमानी होगी। चुनाव प्रचार के बीच में ही भाजपा को नीतीश कुमार पर शक हुआ और उसने जिस प्रकार से अपने पोस्टरों से नीतीश कुमार की तस्वीर गायब की, उससे सिर्फ राजग को नहीं बल्कि भाजपा को भी बड़ा नुकसान हो रहा है। साथ ही जनता ने यह महसूस कर लिया है कि सरकार चलाना अब इनके बूते की बात नहीं है। और इस बात का अंदाजा अब तक न तो भाजपा को हुआ है और न ही जदयू नेतृत्व को।  

प्रश्‍न: आप राजस्थान से आते हैं। राजस्थान और बिहार की राजनीति में क्या मुख्य अंतर देखते हैं?

उत्‍तर: बिहार में कई सारे राजनीतिक दल हैं, मगर इसके उलट राजस्थान में दो ही प्रमुख दल हैं। राजस्थान में भले ही भाजपा की सरकार रही हो मगर विधानसभा के अंदर वे बहुत शक्तिशाली नहीं रहे। हमने मेहनत की, लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाई तो वे सत्ता से सहजता से बाहर हो गए। बिहार में तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां छोटे-छोटे कई दल हैं। अब अच्छी बात यह है कि यहां की जनता 15 वर्षों से एक ही शासन से आजिज आ चुकी है। अब हम राजस्थान की तर्ज पर यहां भी मेहनत कर रहे हैं और आप भी समझ लें कि राजस्थान की तरह बिहार भी नई इबारत लिखने को तैयार है।

प्रश्‍न: आपने राजस्थान में मेहनत करने की बात की? क्या आपको नहीं लगता कि बिहार में पार्टी को और मेहनत करने की दरकार है?

उत्‍तर: आज की वास्तविकता यह है कि हमलोग महागठबंधन के साथ हैं। एक बार जब मजबूत होंगे तो आगे हमारी ताकत और बढ़ती ही जाएगी। आज हमारा बड़ा साथी राजद है। हम उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे राजनीति में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता है। हम जानते हैं कि राजद क्षेत्रीय पार्टी है लेकिन बिहार के संदर्भ में वह बड़ी पार्टी है। यह सही है कि पिछले कुछ वर्षों में हमारी पार्टी अपनी पूरी ताकत का प्रदर्शन नहीं कर पाई लेकिन, हमारी कोशिश होगी कि हम अपनी पार्टी को और व्यापक बनाएं, मजबूत बना सकें। इसके लिए जो भी संभव होगा पार्टी का प्रदेश नेतृत्व केंद्र के सहयोग से अवश्य करेगा।

प्रश्‍न: मुंगेर प्रकरण पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

उत्‍तर: मुंगेर में जो घटना हुई है, वही बिहार की असलियत है। यह आज इसलिए सामने आ पाया क्योंकि चुनाव है और जनता ने आवाज उठा दी। मैं यही कहना चाहता हूं, यही है जंगलराज जिसमें सरकार निरीह नागरिकों पर लाठी-गोलियां चला रही है। निश्चित रूप से सरकार को जनता को जवाब देना होगा। बिहार का चुनाव देश और अन्य राज्यों को दिशा भी दिखाएगा। मैं समझता हूं बिहार से ही पूरे देश में बदलाव आने वाला है।

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